August 5, 2021

शिव की नगरी शिवबाड़ी में भोले के जयघोष से श्रावण माह का हुआ आगाज

शिव की नगरी शिवबाड़ी में भोले के जयघोष से श्रावण माह का हुआ आगाज

शिव की नगरी शिवबाड़ी में भोले के जयघोष से श्रावण माह का हुआ आगाज ।

दूर से ही शिव पिंडी के दर्शन कर धन्य हो रहे शिव भक्त ।

लगातार दूसरे वर्ष भी कोरोना नियमो के चलते जलाभिषेक नही होगा ।

विवेक शर्मा

गगरेट(ऊना)-हिमाचल के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले गगरेट क्षेत्र में सोमभद्रा नदी के किनारे बसी शिव की नगरी शिवबाड़ी उत्तर भारत का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शिवबाड़ी लोगों की आस्था का प्रतीक है । शुक्रवार को संक्रांति से शिव के जयघोष से सावन माह का आरंभ हुआ । मान्यता के अनुसार इस माह को भगवान शिव का माह भी कहा जाता है और पूरे माह शिवभगत भगवान शिव का जलाभिषेक कर बिलपत्र अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते है लेकिन इस वर्ष भी पिछले वर्ष की तरह कोविड नियमों के कारण मात्र शिवलिंग के दर्शनों के लिए मन्दिर खुला है जलाभिषेक करने की इजाजत नही है ।

किंवदंती कथाओं के अनुसार ये शिवलिंग पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य की बेटी जज्याति ने स्थापित किया था । द्रोणाचार्य इस स्थान पर अपने ग्रहस्थ आश्रम के दौरान रहे है । ये स्थान द्रोणनगरी के नाम से भी प्रचलित है । प्राचीन मान्यता के अनुसार पांडव काल मे गुरु द्रोण ने पांडवों को इस स्थान पर धनुर्विद्या भी सिखाई थी । लगभग पांच हजार वर्ग मीटर में फैला शिवबाड़ी का जंगल अपने आप मे ही कई रहस्य समेटे हुए है । स्थानीय लोगों इस मंदिर के आसपास के जंगल की लकड़ी को सिर्फ शव जलाने या फिर जहां स्थित धूने में जलाने के लिए प्रयोग करते है । या यूं कहें कि शिवबाड़ी के इस जंगल की लकड़ी को निजी प्रयोग में लाना शिव की नजरों में भारी अपराध है ।इस आलौकिक परिसर के तीन और पश्मशान है तथा उत्तर की तरफ़ पवित्र सोमभद्रा नदी बहती है जिसका उल्लेख शास्त्रों में इस स्थान की पहचान के लिए भी किया गया है । कोविड के कारण वर्षों पुरानी जलाभिषेक की परपंरा तो टूटी ही साथ मे शिवभगतो के मन मे निराशा भी है कि उन्हें जलाभिषेक करने का मौका नही मिला । मन्दिर के पुजारी अजय शर्मा ने बताया कि कोविड नियमों के पालन के कारण मन्दिर सिर्फ दर्शनों के लिए खुला है इस बार जलाभिषेक करने की इजाजत नही है । वही शिव भक्तों विकास, उदय, संजीव, तुषार, धैर्य, इंदरजीत, अभिषेक, अरविंद, राजेन्द्र आदि के अनुसार सावन माह में शिव का जलाभिषेक करने का अलग ही फल मिलता है शिव के प्रिय मास कहे जाने वाले श्रावण माह में इस बार भी कोरोना का काला साया शिव भक्तों के लिए अड़चन बना हुआ है । परंतु शिवभक्त दूर से ही अलौकिक पिंडी के दर्शन कर अपने आराध्य की पूजा कर सन्तुष्ट हैं ।