December 5, 2021

रंधावा का केजरीवाल को सवाल, दिल्ली में एम.एस.पी से अधिक भाव था तो यू.पी., बिहार और मध्य प्रदेश से धान की फसल पंजाब क्यूं पहुंची

रंधावा का केजरीवाल को सवाल, दिल्ली में एम.एस.पी से अधिक भाव था तो यू.पी., बिहार और मध्य प्रदेश से धान की फसल पंजाब क्यूं पहुंची

‘पैग्गवंत मान’ को सीधी चुनौती, कुछ दिनों के लिए नशे की लत छोड़ कर जंतर-मंतर में धरने में शामिल हों
आम आदमी पार्टी की पंजाब लीडरशिप को कहा, केजरीवाल पीछे लग कर भाजपा की ‘बी’ टीम के तौर पर काम न करें
चंडीगढ़, 16 दिसम्बर:
पंजाब के कैबिनेट मंत्री और सीनियर कांग्रेसी नेता सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के इस दावे कि दिल्ली में किसानों को उनकी फसलों के लिए न्युनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी) से अधिक भाव दिया गया है, को झूठ का पुलंदा ऐलानते हुये सवाल किया कि यदि दिल्ली सरकार ने एम.एस.पी से अधिक भाव पर फसल उठाई तो बिहार, यू.पी. और मध्य प्रदेश से धान की फसल पंजाब बिकने के लिए क्यों पहुँची।
स. सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने कहा कि धान की खरीद के दौरान दूसरे राज्यों से पंजाब में बिकने के लिए आए धान के ट्रकों के ट्रक किसानों और पुलिस की तरफ से पंजाब सरहद पर पकड़े गए। उन्होंने केजरीवाल को सवाल किया कि दिल्ली में धान का कुल उत्पादन पंजाब के एक ब्लॉक की अपेक्षा भी कम होगा, फिर अन्य राज्यों से आने वाली धान की फसल बिकने के लिए दिल्ली क्यों नहीं गयी जबकि आप तो एम.एस.पी. से भी अधिक कीमत पर धान की फसल खरीद रहे थे?
स. रंधावा ने कहा कि केजरीवाल ने अपनी राजनीति की शुरुआत ही झूठ के साथ की थी और गर्म मुद्दों पर भ्रामक झूठे बयान कह कर वह दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचा। उन्होंने कहा कि किसानों का लाभ लेने के लिए की सियासत झूठ पर आधारित है और लोगों को गुमराह करके ही वह दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं।
रंधावा ने कहा कि वास्तव में केजरीवाल भाजपा की तरफ से खड़ा किया गया एक मुखौटा है जो आने-बहाने किसान संघर्ष को कमजोर करने के लिए अपने मालिकों का हुक्म बजा रहा है। उन्होंने कहा कि 23 नवंबर को दिल्ली सरकार की तरफ से किसान विरोधी कानून को लागू करने के लिए जारी किये जाने से बिल्ली थैले से बाहर आ चुकी है। उन्होंने किसान जत्थेबंदियों से अपील की कि वह भाजपा की इस बी टीम की लोमड़ी चालों से सचेत रहें। उन्होंने कहा कि बात-बात पर धरने पर बैठने वाला केजरीवाल आज बहाना बना रहा है कि उसे घर में कैद कर दिया गया है। यहाँ सवाल है कि उसे पहले कभी घर में नजरबंद क्यों नहीं किया गया और अब जब उसे किसान हितों में प्रधानमंत्री निवास के आगे धरना देना चाहिए तो वह बहाने बना रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने जहाँ पंजाब में रोष-प्रदर्शनों के दौरान किसानों को गर्म हवा नहीं लगने दी और अब भी लगातार केंद्र पर दबाव डाल रहे हैं कि किसान हित में इन कानूनों को जल्द वापिस ले लिया जाये।
संगरूर से आम आदमी पार्टी के संसद मैंबर को चुनौती देते हुये कहा कि स. रंधावा ने कहा कि लोगों में पैग्गवंत मान के तौर पर जाने जाते कॉमेडियन से राजनीतिज्ञ बने भगवंत मान यदि सचमुच किसान हितैषी हैं तो कुछ दिनों के लिए अपनी नशे की लत त्याग कर केंद्र सरकार के विरुद्ध जंतर-मंतर में धरना दें। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब, धार्मिक समागमों, दाह-संस्कार के मौके और संसद तक नशे की हालत में पहुँचने वाले भगवंत मान यदि जंतर-मंतर में कुछ दिन नशे के बिना धरना देने में कामयाब हो गए तो इससे लोगों में कम से -कम यह विश्वास बहाल कर सकेंगे कि वह अपने-आप पर तो कंट्रोल कर ही लेते हैं।
आम आदमी पार्टी की पंजाब लीडरशिप को केजरीवाल के पीछे लग कर भाजपा की ‘बी’ टीम के तौर पर किसान विरोधी काम न करने की अपील करते हुये . रंधावा ने कहा कि भाजपा की तरफ से देश के कुछ चुनिंदा औद्योगपतियों के साथ मिल कर देश में से विरोधी पक्ष को खत्म करने के लिए रची गई साजिश का एक पात्र है केजरीवाल। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने भाजपा और इन अदारों के इशारे पर ही 2016 में, जब किसान बिलों की कोई चर्चा भी नहीं थी, अपने एक टवीट के द्वारा कृषि में बड़े अदारों के निवेश की वकालत करके इन कानूनों का आधार बांधा था। उन्होंने आम आदमी पार्टी लीडरशिप को सवाल किया कि क्या उनको केजरीवाल की तरफ से बार-बार पानियों, पराली मामले समेत अन्य मुद्दों पर पंजाब विरोधी स्टैंड लेने और अब जल्द में काले खेती कानूनों को लागू करने के लिए नोटिफिकेशन जारी करना दिखाई नहीं देता? क्या आपके लिए संकुचित राजनैतिक फायदे किसानों और पंजाब के हितों से भी बड़े हो गए हैं?