इतिहास कभी अलविदा नही कहता वह कह कर जाता है फिर मिलेंगे ।

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By Admin

विवेक शर्मा ।
मंडी जिला के पुरानी मंडी में रहने वाले लेखक अमर चंद शर्मा द्वारा लिखी गई सवाधीनता संग्राम पर पुस्तक उस समय सुर्खियों में आई जब इस पुस्तक का विमोचन विधिवत रूप से उनकी पुत्री तनुजा शर्मा मीरा के प्रयासों से सफल हो पाया । लेखक अमर चन्द जिन्होंने लगभग 30 वर्ष पूर्व एक किताब लिखी थी । उस किताब को किन्ही कारणों से छपवा नही सके । इस पुस्तक को कुछ पन्नो पर सहेज कर कुछ सीमित लोगो तक पहुंचाया भी गया और तब इसे खूब वाहवाही मिली । लेकिन इस किताब को लेखक छपवा न पाया । भारत सरकार द्वारा उस समय इस पुस्तक को दस हजार रुपए इनाम भी दिया गया अनेक समारोह में इस पुस्तक और लेखक को सम्मानित भी किया गया लेकिन किताब न छप पाई और समय के साथ इसे एक अलमारी में रख दिया गया । लेखक अमर चन्द शर्मा की बेटी जो कि स्वयं विज्ञान की छात्रा रही है तनुजा शर्मा जो कि साहित्य जगत में मीरा के नाम से विख्यात हो गई और अनेक पुस्तकें लिख डाली । तनुजा शर्मा ने समय अपनी पुस्तक तुम्हारी मीरा के साथ साथ अपने पिता की लिखी किताब 1857 से 1947 तक स्वाधीनता सग्राम की कहानी नाम से इस पुस्तक का विमोचन एक साथ किया ।

मुझे अपनी किताब की इतनी खुशी नही मिली जितनी अपने पिता की लिखी किताब को लोगो मे पहुंचा कर मिली है । शायद एक बेटी के लिए इस से बड़ा सपना दूसरा कोई नही हो सकता । तनुजा शर्मा मीरा


लगभग 30 वर्ष पहले लिखी इस कहानी को पन्नो में संजो कर रखे रखा था । परंतु मेरी बड़ी बेटी तनुजा ( मीरा ) के प्रयासों से इन पन्नो में मानो पंख लग गए और एक किताब के रूप में उड़ान भरनी शुरू कर दी । इस किताब के विधिवत विमोचन के बाद अब आ कर मेरी मेहनत सफल हुई है ।
अमर चंद शर्मा लेखक

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