अब सड़क पीड़ितों की जान बचाने व मदद को बेझिझक आएं आगेकेंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने जारी की नई अधिसूचना

Himachal Pradesh
By Admin

ऊना, 19 जनवरी: सड़क दुर्घटनाओं के दौरान पीड़ितों की जान बचाने और उनकी मदद के लिए आगे आने वाले प्रत्यक्षदर्शियों और जिम्मेदार नागरिकों की व्यक्तिगत सुरक्षा और उनको प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की गई है। आरटीओ ऊना एमएल धीमान ने बताया कि अधिसूचना के माध्यम से प्रत्यक्षदर्शियों को उत्पीड़न से बचाने के लिए पुलिस, अस्पतालों व अन्य प्राधिकरणों द्वारा अनिवार्य रूप से अनुपालना करने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। धीमान ने कहा कि भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा सभी प्रदेश सरकारों को इन हिदायतों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए कहा है। इस अधिसूचना के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं के समय पीडि़त व्यक्ति के मदद करने वाले प्रत्यक्षदर्शियों एवं नेक नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। इसमें बताया गया है कि मददगार किसी सिविल या आपराधिक दायित्व के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अगर वह सड़क हादसे में घायल हुए व्यक्ति के बारे में पुलिस अथवा आपातकालीन सेवाओं को फोन द्वारा सूचित करता है तो वह फोन पर या व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना नाम व व्यक्तिगत विवरण देने के लिए बाध्य नहीं होगा। उसके द्वारा अपना नाम, संपर्क विवरण सहित अन्य व्यक्तिगत विवरण बताए जाने को स्वैच्छिक तथा वैकल्पिक बनाया गया है। लोक अधिकारियों द्वारा उसे नाम तथा व्यक्तिगत विवरण देने के लिए बाध्य या धमकाने की स्थिति में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक व विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा यदि कोई नागरिक स्वैच्छिक रूप से उल्लेख करता है कि वह दुर्घटना का प्रत्यक्षदर्शी भी है तो ऐसी स्थिति में पुलिस द्वारा अथवा मुकद्दमे के दौरान यदि उसकी जांच अपेक्षित है, तो उससे एक बार ही पूछताछ की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया अपनाते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्यक्षदर्शी को उत्पीड़ित या धमकाया न जाए।आरटीओ एमएल धीमान ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों और मदद के लिए आगे आने वाले नागरिकों की सुरक्षा के दृष्टिगत स्वास्थ्य संस्थानों पर लागू होने वाले दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिसूचना में यह साफ बताया गया है कि कोई भी निजी या सरकारी स्वास्थ्य संस्थान दुर्घटना पीड़ित की मदद के लिए आगे आने वाले प्रत्यक्षदर्शी को न रोके और पंजीकरण एवं भर्ती लागतों की मांग न करें जब तक कि वह स्वयं घायल या पीड़ित व्यक्ति के परिवार का सदस्य या सगा-संबंधी न हो। घायल व्यक्ति का तत्काल इलाज किया जाए। सभी अस्पताल अपने प्रवेश द्वार पर हिंदी, अंग्रेजी अथवा क्षेत्रीय भाषा में इस आशय का चार्टर प्रकाशित करें। उन्होंने कहा कि अधिसूचना में जारी अनिवार्य दिशा-निर्देशों की सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा अनुपालना न किए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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