पंजाब ने मृत्यु दर को 1.3 फ़ीसदी तक रोका, ज़्यादातर मौतें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामलों में हुईं

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तकरीबन 77 फ़ीसदी मौतें अंतिम पड़ाव वाले सह-रोग के नतीजे के कारण हुई -अनुराग अग्रवाल
चंडीगढ़, 28 मई:
देश भर में सबसे अधिक 91 प्रतिशत रिकवरी दर्ज करने के अलावा, पंजाब में मृत्यु दर को भी सबसे कम 1.3 फ़ीसदी तक रोकने में कामयाब रहा है, जिनमें से ज़्यादातर मौतें सह-रोग के नतीजे के तौर पर हुई हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के प्रमुख सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि पंजाब में अब तक 40 मरीज़ों की मौत हुई है, उनकी उम्र 50 साल से अधिक थी। इनमें से 31 व्यक्ति (77 प्रतिशत) अंतिम पड़ाव पर गुरदे, कैंसर और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों के अलावा मधुमेह और हाई-ब्ल्ड प्रैशर से जूझ रहे थे।
उन्होंने आगे बताया कि बाकी के 23 प्रतिशत मामलों में मरीज़ मुख्य तौर पर दिल की बीमारी, हाईपरटैंशन, मधुमेह और मोटापा जैसी पुरानी बीमारियों से सम्बन्धित थे और ऐसे मामले बहुत कम थे, जिनको कोई बीमारी नहीं थी।
उन्होंने कहा कि ज़्यादातर मामलों में उन मरीज़ों की मौत हुई है जो पहले ही गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिस कारण उनकी मौत कुदरती तौर पर भी हो सकती थी। अब तक रिपोर्ट किए कुल 2106 पॉजि़टिव मामलों में से 1918 मरीज़ पहले ही पूरी तरह ठीक हो चुके हैं।
वैज्ञानिक और योजनाबद्ध ढग़ से प्रभावित मरीज़ों के संपर्क में आए व्यक्तियों का पता लगाने के साथ-साथ लॉकडाउन को प्रभावशाली ढंग से लागू करने संबंधी बात करते हुए श्री अग्रवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब में कोविड-19 के दुगने होने की दर लगभग 100 दिन रह गई है, जो कि काफी बेहतर है।
श्री अग्रवाल ने बताया कि आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी मामलों में, यदि मरीज़ों को कोई पुरानी बीमारी के बिना कोविड से प्रभावित पाया जाता है, तभी उसकी मौत को कोविड से मौत माना जाता है। राज्य की मृत्यु दर, राष्ट्रीय औसत मृत्यु दर (3 प्रतिशत) की अपेक्षा भी बहुत कम है।
श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि इसके अलावा बहुत से मामलों में मृतक देहों के नमूने लिए गए हैं, जिनमें से कुछ पॉजि़टिव पाए गए परन्तु यह सभी मौतें कोविड-19 मौत के तौर पर ली गई, जबकि यह नमूने सिफऱ् संभावित पॉजि़टिव मामलों के संपर्क का पता लगाने के लिए लिए गए थे।
डॉ. तलवाड़ के नेतृत्व अधीन एक माहिर कमेटी को राज्य में हुई मौतों का विश£ेषण और समीक्षा करने और उसके अनुसार सुधारात्मक कार्यवाही करने के लिए भी निर्देश दिए गए। माहिरों की कमेटी द्वारा विस्तृत रूप में मौत के मामलों की समीक्षा की गई और अपडेशन के द्वारा राज्य में काम कर रहे डॉक्टरों को ताज़ा जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य सेवाओं की डॉयरैक्टर डॉ. अवनीत कौर ने बताया कि आठ मरीज़ अंतिम पड़ाव पर गुरदों की बीमारी से जूझ रहे थे और वह डायलिसिस पर थे, इसलिए उनकी जान पहले ही ख़तरे में थी। इसके अलावा 9 मरीज़ मधुमेह की गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे।
उन्होंने आगे बताया कि कुछ मामलों में मरीज़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमज़ोर थी, क्योंकि वह एचआईवी पॉजि़टिव थे। ऐसे मरीज़ बहुत जल्द संक्रमित होते हैं और उनके पास संक्रमण से लडऩे की क्षमता भी बहुत कम होती है।

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