अमृतसर रेल हादसा -मुख्यमंत्री द्वारा जि़म्मेदार लोगों के खिलाफ कार्यवाही के हुक्म

Punjab REGIONAL
By Admin
मैजिस्ट्रेट जांच में हादसे के लिए रेल क्रॉसिंग के गेटमैन और प्रबंधकों को कसूरवार ठहराया
चंडीगढ़, 6 दिसंबर
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज अमृतसर रेल हादसे की मैजिस्ट्रेटी जांच में जि़म्मेदार ठहराए गए व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के हुक्म दिए हैं। मैजिस्ट्रेट जांच में इस दुखद हादसे के लिए हुई चुकों और लापरवाहियों के अलग -अलग कारणों के लिए जोढ़ा फाटक में रेलवे क्रॉसिंग के गेटमैन और समागम के प्रबंधकों को जि़म्मेदार ठहराया है।
मुख्यमंत्री के हुक्म पर जालंधर के डिविजऩल कमिशनर बी. पुरूषार्थ ने इस हादसे की मैजिस्ट्रेटी जांच की थी। दशहरे वाले दिन घटे इस हादसे में 61 व्यक्तियों की जान चली गई थी।
मैजिस्ट्रेटी जांच में सार्वजनिक जगह /सरकारी ज़मीन पर समागम के प्रबंधों सम्बन्धी नियम और निगरानी के प्रसंग में भयानक स्थिति का खुलासा किया गया है।
यह भी पाया गया है कि समागम के प्रबंध, नियम और निगरानी के साथ सम्बन्धित हरेक व्यक्ति से ड्युूटी में कोताही समेत घोर लापरवाही हुई है। यह ठीक है कि ड्युूटी में ऐसी गलती /लापरवाही पहली बार नहीं हुई परन्तु यह रेल मुलाजिमों की तरफ से बड़ी भूल और इससे घटे हादसे के साथ जुड़ी हुई है।
सरकार को सौंपी गई व्यापक रिपोर्ट में इस हादसे के साथ जुड़े सभी पक्षों को जाँच की गई है। यह रिपोर्ट प्रभावित लोगों और जि़ला प्रशासन और रेलवे से सम्बन्धित कर्मचारियों के साथ की गई मुलाकात पर आधारित है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक चाहे दर्शकों ने रेल ट्रैक से इस समागम को देखने की भूल की जबकि प्रबंधकों ने किसी आज्ञा के बिना सुरक्षा के लिहाज़ से ज़रुरी कदम उठाए बिना यह समागम करवाया।
रिपोर्ट में कानून का पालन करने में नाकाम रहने और अनावश्यक उदारता दिखाने के लिए पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों /कर्मचारियों को भी कसूरवार ठहराया है। इसी तरह रेलवे मुलाज़ीम रेलवे ट्रैकों पर बड़ी संख्या में लोगों के उपस्थित होने बारे अच्छी तरह पता होने के बावजूद उनकी सलामती और सुरक्षा पक्ष से कदम उठाने में असफल रहे हैं।
जांच के निष्कर्ष मुताबिक गेट नंबर 27 के जोढ़ा फाटक का गेटमैन अमित सिंह न सिफऱ् अपनी ड्युूटी निभाने में नाकाम रहा बल्कि बचाव और सुरक्षा के लिहाज़ से उचित कदम न उठाकर उसने बहुत बड़ी भूल की क्योंकि यदि ऐसा किया होता तो इस हादसे से आसानी से बचा जा सकता था। अमित सिंह उन मुख्य रेल मुलाजिमों में से एक है जिनकी गलती के कारण यह हादसा घटा।
जांच रिपोर्ट में 26 नंबर गेट के गेटमैन को भी उसकी नाकामी के लिए कसूरवार ठहराया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रत्यक्ष तौर पर ज़ाहिर होता है कि गेट नंबर 26 के रेलवेज़ स्तर क्रॉसिंग का गेटमैन निर्मल सिंह की तरफ से गेट नंबर 27 के जोढ़ा फाटक के गेटमैन को देरी से सूचित करना उसकी ड्युूटी के प्रति लापरवाही को दिखाता है। उसे शाम 5.30 बजे के करीब रेल ट्रैकों पर लोगों के इक_े होने का पता लग गया था परन्तु उसने गेट नंबर 27 के गेटमैन अमित सिंह को शाम 6.40 -6.45 बजे के दौरान सूचित किया। उसने सम्बन्धित स्टेशन मास्टर को भी नहीं बताया और वहाँ से गुजऱने वाली गाड़ीयों को सही सिग्नल देना जारी रखा। इस कारण वह भी यह भारी भूल के लिए जि़म्मेदार है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक प्रबंधकों के पास धोबी घाट में रावण को जलाने समेत दशहरे के त्योहार को मनाने के लिए किये समागम के लिए किसी तरह की मंज़ूरी /आज्ञा नहीं थी और उन्होंने यह समागम दर्शकों की सुरक्षा को दाव पर लगाकर ग़ैर -कानूनी ढंग से करवाया।
रिपोर्ट मुताबिक यह भी स्पष्ट होता है कि प्रबंधकों ने दशहरे के त्योहार और रावण जलाने को देखने के लिए आने वाले लोगों की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए ज़रुरी कदम उठाए बिना यह समागम किया गया।
रेलवे को सूचित करने में नाकाम रहने के लिए प्रबंधकों को जि़म्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि प्रबंधकों ने न तो रेलवे को अवगत करवाया और न ही रेल ट्रैक से समागम देख रहे लोगों को रोकने के लिए सावधानी और सुरक्षा पक्ष से कोई कदम उठाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक सीधे -सादे ढंग से जानकारी दे दी जाती तो रेलवे ने सावधानी के हुक्म जारी करके इन रेल ट्रैकों पर गाड़ीयाँ चलने बारे चौकन्ना करने के साथ-साथ अन्य सुरक्षा कदम उठा लेने थे जिससे यह हादसा आसानी से टाला जा सकता था।
जांच में यह भी स्पष्ट किया गया स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डा. नवजोत कौर सिद्धू जो समागम में मुख्य मेहमान के तौर पर शामिल थी, की यह समागम करवाने में कोई भूमिका नहीं थी।
रिपोर्ट के मुताबिक यदि प्रबंधक दशहरे देखने आए लोगों की सुरक्षा के प्रति संजीदा होते और समागम वाले मैदान और रेल ट्रैक बाँटती दीवार के साथ 10 -12 फुट का दिखाई देने वाला कटर लगाया होता तो यह हादसा रोका जा सकता था।

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