पी.एस.डी.एम. द्वारा ग्रामीण कौशल योजना के अंतर्गत प्लेसमेंट सम्बन्धी 2 दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन

Chandigarh
By Admin
चंडीगढ़, 21 अक्तूबर:
राज्य में दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डी.डी.यू -जी.के.वाई) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंजाब कौशल विकास मिशन द्वारा 2 दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण वर्कशॉप का आयोजन करवाया गया जिसके दौरान उक्त योजना के अंतर्गत दी जा रही प्लेसमेंट की सुविधा सम्बन्धी जांच और निगरानी जैसे मुद्दों को विचारा गया। इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए पंजाब कौशल विकास मिशन के प्रवक्ता ने बताया कि इस वर्कशॉप को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रुरल डिवैल्पमैंट, हैदराबाद (एन.आई.आर.डी एंड पी.आर) द्वारा पंजाब और हरियाणा के लिए आयोजत किया गया था।
इस दौरान डायरैक्टर (एम एंड ई), एन.आई.आर.डी एंड पी.आर, श्री शंकर दत्त ने पंजाब और हरियाणा की कौशल विकास मिशन की टीम को संबोधन किया जिसके अंतर्गत उनकी माहिर टीमों द्वारा प्लेसमेंट की प्रक्रिया और लाभार्थियों सम्बन्धी निगरानी रखने जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब में चल रहे 22 दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डी.डी.यू -जी.के.वायी) प्रोजेक्टों की प्रगति का जायज़ा लेने के लिए एक समीक्षा मीटिंग भी की गई। इस मौके पर श्री शंकर दत्त, डायरैक्टर, (एम.एंड.ई), एन.आई.आर.डी एंड पी.आर द्वारा प्रोजैक्ट को चलाने वाली एजेंसियों के कामकाज का मुल्यांकन, एजेंसियों के लिए निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति, असेसमेंट, सर्टीफिकेशन और करवाई गई प्लेसमेंटों के आंकड़ों के आधार पर किया गया।
यहाँ और जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब कौशल विकास मिशन और राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (एन.एस.डी.सी) द्वारा साझे रूप में एन.एस.क्यू.एफ. की सिफ़ारिश के लिए एक राज्य स्तरीय वर्कशॉप का आयोजन भी किया गया। इस समारोह में एनएसडीए, एन.एस.डी.सी, एस.एस.सी.(सैक्टर स्किल काऊंसिल्ज़), अलग -अलग उद्योग और प्रशिक्षण पार्टनरों से आए प्रतियोगियों ने भाग लिया। इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य सहयोगियों को एन.एस.क्यू.एफ. की ज़रूरत और उद्योगों में कुशल कामगारों की महत्ता सम्बन्धी जागरूकता प्रदान करना था। इस मौके पर माहिरों द्वारा एन.एस.क्यू.एफ. से आए प्रतियोगियों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने वाले तौर-तरीकों और साधनों और एन.क्यू.ए.एफ द्वारा सुझाए उद्योगों की माँग अनुसार मिलने वाली नौकरियों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही परंपरागत कला और शिल्प से सम्बन्धित कई अन्य पेशे जैसे फुलकारी निकालना और जूती बनाना आदि की ओर रुझान करने पर भी चर्चा की गई।

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