पासवान ने चालू सीजन के दौरान धान की खऱीद के लिए सी.सी.एल. जारी करने  के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री को दिया भरोसा

Punjab
By Admin

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पंजाब में अफ़ीम की खेती को आज्ञा देने के हक में नहीं

 नई दिल्ली, 4 अक्तूबर

उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने राज्य में धान की खऱीद के चल रहे सीजन के लिए नगद हद कजऱ् (सी.सी.एल.) जारी करवाने के लिए लम्बित पड़े सभी मुद्दों के समयबद्ध हल के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को भरोसा दिलाया है।

केंद्रीय खाद्य मंत्री ने गेहूँ (आर.एम.एस. 2017 -18) पर खऱीद स्टॉक और आई.डी.सैस के 500 करोड़ रुपए के बकाया के पुनर्भुगतान को तुरंत जारी करने के लिए भी पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को विश्वास दिलाया। उन्होंने साल 2018 की दूसरी और तीसरी तिमाही के लिए एन.एफ.एस.ए. अधीन लम्बित पड़ी 857 करोड़ रुपए की सब्सिडी के 400 करोड़ रुपए को एक या दो दिनों में जारी करने के लिए विभाग के कर्मचारियों को निर्देश दिए। कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से धान की निगरानी और रख-रखाव के 435 करोड़ रुपए जल्दी से जारी करने की की गई विनती के संदर्भ में श्री पासवान ने उपरोक्त निर्देश जारी किये।

सी.सी.एल. को समय पर जारी करवाने को यकीनी बनाने से सम्बन्धित विभिन्न महत्वपूर्ण लम्बित पड़े मामलों के जल्दी से हल करने के लिए केंद्रीय मंत्री के साथ एक मीटिंग के बाद यह खुलासा कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने श्री पासवान के साथ सभी लम्बित भुगतान बारे विचार विमर्श किया और उन्होंने इसके तेज़ी से हल का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्टोर किये अनाज की बिना किसी अड़चन निकासी का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही उन्होंने श्री पासवान से अपील की कि वह इस निकासी को तेज़ी से करवाने के लिए एफ.सी.आई को निर्देश जारी करें जिससे नये अनाज को स्टोर करने के लिए जगह बन सके।

उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वह यह मुद्दा रेलवे मंत्री के पास भी उठाएंगे और अनाज की ढुलाई में तेज़ी लाने के लिए और रेल गाड़ीयों की माँग करेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मौजूदा सीजन के दौरान पंजाब में एक लाख क्विंटल की पहले ही खरीद हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में पत्रकारों को बताया कि उनकी सरकार द्वारा सब्सिडी दरों पर किसानों को मुहैया करवाई जा रही मशीनों /साजो-सामान से कुछ हद तक पराली जलाने पर नियंत्रण लगने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को रोकने के लिए पहले ही कानून हैं और ज़रूरत पडऩे पर कानून के अनुसार कार्यवाही की जायेगी।

एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पंजाब में अफ़ीम की खेती को आज्ञा देने के हक में नहीं हैं क्योंकि पंजाब नशों की गंभीर समस्या से लड़ रहा है।

करतारपुर रास्ते के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय विदेश मामलों की मंत्री सुष्मा स्वराज को एक पत्र लिखकर यह मामला पाकिस्तान के समक्ष उठाने के लिए कहा है जिससे अगले साल श्री गुरु नानक देव जी के 550वें जन्म दिवस सम्बन्धी समारोहों के लिए इस रास्ते को खुलवाया जा सके।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री को एक अर्ध सरकारी पत्र पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लम्बित पड़े मुद्दों बारे फ़ैसला लेने में भारत सरकार की तरफ से देरी के नतीजे के तौर पर पंजाब सरकार खाद्य नगद कजऱ् खाते के अंतर को समाप्त करने के लिए वित्तीय बाधाओं का सामना कर रही है जिससे धान की खरीद के चल रहे सीजन के लिए नगद हद कजऱ् जारी करने में देरी की संभावना है।

उन्होंने पासवान को बताया, ‘‘हम धान की निर्विघ्र खरीद को यकीनी बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय और भारतीय खाद्य निगम की तरफ से लम्बित भुगतान को जल्द ही जारी करने से हमें किसानों को समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी और किसानों पर दबाव को अगर पूरी तरह ख़त्म नहीं किया जा सकता तो इसे घटाया जा सकता है।’’

मुख्यमंत्री की तरफ से उठाए गए लम्बित पड़े मुद्दों में 30 जून, 2017 तक गेहूँ (आर.एम.एस. 2017 -18) के पास पड़े स्टॉक पर खऱीद टैक्स और आई.डी.सैस के बकाया 50 प्रतिशत का पुनर्भुगतान करना शामिल था। उन्होंने बताया कि पहली जुलाई, 2017 से जी.एस.टी. लागू होने से खऱीद टैक्स, आई.डी. सैस और वैट को जी.एस.टी. में शामिल कर दिया गया है। इस कारण रबी 2017 -18 के दौरान गेहूँ की खरीद पर खऱीद टैक्स और आई.डी. सैस भुगतानयोग्य है, क्योंकि यह जी.एस.टी. लागू होने से पहले का है, यह खऱीद सीजन 31 मई, 2017 को ख़त्म हो गया था। इस कारण 984 करोड़ रुपए के पुनर्भुगतान के मुकाबले केंद्र ने सिफऱ् 50 प्रतिशत पुनर्भुगतान किया है।

साल 2018 की दूसरी और तीसरी तिमाही के लिए एन.एफ.एस.ए के अधीन सब्सिडी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के अधीन तकरीबन चार लाख टन गेहूँ पंजाब में 30 सितम्बर, 2018 तक दूसरी तिमाही के दौरान बाँटा गया। उन्होंने बताया कि यह सब्सिडी अभी प्राप्त की जानी है। उन्होंने इसको तुरंत जारी करने के लिए केंद्रीय मंत्री के दख़ल की माँग की। उन्होंने साल 2018 की तीसरी तिमाही की सब्सिडी का पहला भुगतान करने के लिए भी कहा है।

धान की निगरानी और रख-रखाव (सी.एंड.एम) के चार्जिज़़ का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य की खऱीद एजेंसियों के द्वारा केंद्रीय अनाज भंडार के लिए सावन की फ़सल 2003 -04 से 2016 -17 तक खऱीद किये धान के सुरक्षित रख-रखाव के लिए ख़र्च आए अंदाजऩ 735 करोड़ रुपए के सी.एंड.एम. का दावा पहले ही पेश किया है। इसमें से एफ.सी.आई. ने राज्य एजेंसियों को 300 करोड़ रुपया जारी कर दिया है परन्तु बाकी राशि अभी भी लम्बित पड़ी हुई है। सावन की फ़सल 2009 -10 से लेकर आगे तक राज्य एजेंसियों की तरफ से मिल्लरों को लकड़ी के करेटों के भुगतान के यूजर चार्जिज़़ के पुनर्भुगतान का मुद्दा खाद्य मंत्रालय की तरफ से स्पष्टीकरण जारी करने में देरी के कारण अभी भी लम्बित पड़ा हुआ है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ओपन प्लिंथों पर स्टोर किए गेहूँ पर निगरानी और रख-रखाव का मुद्दा भी उठाया और उन्होंने रबी 2007 -08 से 2013 -14 तक अंतिम लागत शीट में संशोधन की माँग की। उन्होंनेे इन सालों के दौरान गेहूँ को स्टोर करने के लिए कवर और प्लिंथों पर राज्य सरकार /एजेंसियों के निगरानी और रख-रखाव चार्जिज़़ की आज्ञा की माँग की और इसके अनुसार पुनर्भुगतान करने के लिए कहा।

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