अलविदा 2018 : कठोर फैसलों के साथ रेप पीड़ितों को वर्ष 2018 में मिला इंसाफ

Chandigarh
By Admin
सालों से लंबित केसों पर जिला अदालत ने सुनाया अपना फैसला
भ्रष्टाचारी पुलिसकर्मियों, नेताओं व हत्यारों को सुनाई गई कठोर कारावास की सजा
चंडीगढ़, 25 दिसंबर (एम.एस बिष्ट ): वर्ष 2018 अपने कठोर फैसलों के लिए अहम रहा, इस वर्ष रेप पीड़ितों को इंसाफ मिला। जिस कारण लोगों का न्याय प्रणाली पर विश्वास मजबूत हुआ, जिला अदालत ने जहा गैंग रेप की शिकार हुई पीड़िताओं को न्याय देते हुए इस जगन्य अपराध को अंजाम देने वाले अपराधियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई, इसी तरह इस वर्ष नेताओं व पुलिस कर्मियों पर कई सालों से चल रहे केसों का निपटरा करते हुए अदालत ने उन्हे भी दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। जिला अदालत ने अपने फैसलों के साथ सजा पाने वाले लोगों पर अपनी कठोर टिप्पणी करते हुए बताया कि इन लोगों की समाज में क्या भूमिका थी और इन्होने समाज में क्या भूमिका अदा की है। इससे समाज को क्या नुक्सान पहुंचा। इस साल जिला अदालत द्वारा किए गए बड़े फैसलों पर एक नजर है। जोकि अपडेट पंजाब द्वारा इस साल का लेखा जोखा आप तक पहुचाया जा रहा है।
27 फरवरी 2018 : नाबालिग से दुराचार करने वाले पांच को 25-25 साल कठोर कारावास, 2.15-2.15 लाख रुपये जुर्माना
वर्ष 2015 में मनीमाजरा में ट्यूशन से घर लौट रही नाबालिग का अपहरण कर उससे सामूहिक दुराचार मामले में जिला अदालत ने पांचों दोषियों को 25-25 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। दोषी पाए जाने वालों में रेलवे कॉलोनी, मौलीजागरां निवासी चंद्रशेखर (22), गोबिंदपुरा मनीमाजरा निवासी बंसी (35), गांव फैदां के सुरजीत सिंह (35) और शेखर राणा (21) के अलावा सेक्टर-68 गुरुद्वारे के पीछे कुम्हारा, मोहाली निवासी साहिल वर्मा (22) शामिल थे। अदालत ने दोषियों पर 2.15-2.15 लाख रुपये प्रत्येक पर जुर्माना भी लगाया था। इस जुर्माना राशि में से 2-2 लाख रुपये प्रत्येक में से (कुल 10 लाख) बतौर मुआवजा पीड़िता को देने के आदेश हुए थे। मनीमाजरा थाना पुलिस ने पांचों के खिलाफ सितंबर 2015 में आईपीसी की धारा 363, 376, 376 (डी) और पॉक्सो एक्ट 4, 8, 12 के तहत मामला दर्ज किया था। 12 सितंबर 2015 को दर्ज मामले के अनुसार 17 वर्षीय और 12वीं में पढऩे वाली पीड़िता 11 सितंबर की शाम करीब 7 बजे ट्यूशन से घर आ रही थी। जैसे ही वह रास्ते में एक पार्क के पास पहुंची तो एक सफेद रंग की वैन उसके पास आई और उसमें से एक युवक ने उसका हाथ पकड़ उसे जबरन अंदर खीच लिया। पीड़िता ने जैसे ही शोर मचाया तो दूसरे युवक ने उसके मुंह पर हाथ रख लिया। ताकि उसकी आवाज बाहर न जा सके। साथ ही उसके मुंह पर कपड़ा रख दिया। वैन में पांच युवक सवार थे। सभी आरोपी उसे कलाग्राम के पास जंगली एरिया में ले गए। वहां पांचों आरोपियों ने उसके साथ बारी-बारी से दुराचार किया। दुराचार के बाद सभी उसे वहीं छोड़ कर मौके से फरार हो गए। जैसे-तैसे वह रात 11 बजे घर पहुंची थी। वारदात के बाद पीड़िता बहुत सदमे में आ गई थी। वहीं उसे चोट भी बहुत आई थी। उसके शरीर के प्राइवेट पार्ट्स में अंदरूनी हिस्सों तक में गंभीर जख्म थे।
06 जून 2018 : जम्मू सैक्स स्कैंडल में पूर्व डीआईजी, डीएसपी समेत पांचों दोषियों को 10-10 साल की सजा
12 साल पुराने हाईप्रोफाइल जम्मू सेक्स स्कैंडल मामले में सीबीआई की विशेष अदालत की जज गगन गीत कौर ने बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर, शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद और शब्बीर अहमद लान्गू को 10-10 साल की सजा सुनाई थी। अदालत ने पूर्व डीआईजी पाड़ी, पूर्व डीएसपी मीर पर 1-1 लाख रुपये और अन्य तीनों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। 30 मई 2018 को पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी और बिजनेसमैन मेहराजुद्दीन मलिक के खिलाफ आरोप साबित न होने पर उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर चुकी है। वहीं मामले में दो आरोपियों सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।  मामला मार्च 2006 का है। मामला उस समय चर्चा में आया था जब जम्मू एवं कश्मीर में एक पोर्न एमएमएस वायरल हुआ था। सबीना नामक महिला पर हाई प्रोफाइल लोगों को देह व्यापार के लिए लड़कियां सप्लाई करने का आरोप था। इस काम में उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला पर भी आरोप लगा था। हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच 2006 में सीबीआई को सौंप दी गई थी। साथ ही 2009 में केस चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था।
31 अगस्त 2018 : गैंग रेप के आरोपियों को अंतिम सास तक आजीवन कारावास की सजा
देहरादून निवासी और मोहाली में पीजी में रहने वाली 21 वर्षीय युवती से नवंबर 2017 में सेक्टर-53 में हुए गैंगरेप के मामले में विशेष अदालत की एडीजे पूनम आर जोशी ने तीनों दोषियों को अंतिम सास तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा पाने वालों में मोह मद इरफान (27 वर्ष) मूल निवासी अंबेडकरनगर यूपी, किस्मत अली (21 वर्ष) मूल निवासी अमेठी यूपी और मोह मद गरीब (21 वर्ष) मूल निवासी फैजाबाद यूपी शामिल थे। अदालत ने तीनों को आईपीसी की धारा 376डी और 506 के तहत दोषी करार देते हुए सजा के अलावा 2.05-2.05 लाख रुपये प्रत्येक पर जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि में से दो-दो लाख (कुल छह लाख) रुपये पीड़िता को बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए थे। इससे पहले सेक्टर-36 थाना पुलिस ने मोह मद इरफान, मोह मद गरीब और किस्मत अली उर्फ पोपू के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (डी), 376 (2) जी और 506 के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि बाद में पुलिस ने तीनों के खिलाफ चार्जशीट आईपीसी की धारा 376 (डी) (सामूहिक दुराचार) और 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) के तहत दायर की थी। इन्हीं दोनों धाराओं में अदालत ने ट्रायल चलाया था। तीनों की डीएनए रिपोर्ट भी पॉजीटिव आई थी। वहीं पीड़िता ने भी तीनों को अदालत में पहचानते हुए उनके खिलाफ बयान दिए थे। केस में कुल 19 सरकारी गवाह पुलिस की ओर से पेश किए गए थे।
17 सितंबर 2018 : अढ़ाई साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले युवक को जिला अदालत ने 15 साल कैद की सजा सुनाई थी। आरोपी पर 1 लाख 5 हजार रूपए का जुर्माना भी लगाया गया था। दोषी को पोस्को की धारा-6 के तहत सजा सुनाई गई थी। सजा पाने वाले युवक की पहचान उमानाथ गुरी उर्फ भूरा(21) के रूप में हुई थी। फैसला सुनाने के पीछे अदालत ने कहा कि दोषी के खिलाफ कोई नरमी नही बरती जा सकती, दोषी की उम्र पिता बनने की थी। उसे बच्चों के बारे में समझना चाहिए था। दोषी को पिता को छोटे बच्चे को पता होना चाहिए। लेकिन बच्चे की रक्षा करने के बजाय, उसने ऐसी छोटी लड़की के साथ अपनी वासना को पूरा करने की कोशिश की है जिसे भारतीय समाज में देवी माना जाता है और विभिन्न अवसरों पर भी पूजा की जाती है । ऐसे में उसपर रहम नही किया जा सकता है।
28 नवंबर 2018 : देहरादून की रहने वाली 27 वर्षीय फैश्न डिजानर से छेड़छाड कर रेप की कोशिश करने वाले आटों ड्राइवर को जिला अदालत ने 18 साल कैद की सजा सुनाई थी। उसपर 1 लाख 68 हजार रूपए का जुर्माना भी लगाया गया था। सजा पाने वाले आटो चालक की पहचान सैक्टर-42 के रहने वाले मुकेश सिंह के रूप में हुई थी। पीड़िता देहरादून की रहने वाली थी। वह चंडीगढ़ में हो एक फैशन शो में हिस्सा लेने आई थी। सैक्टर-42 में अपने किसी जानकर के घर रूकी हुई थी। घटना वाले दिन देर-रात करीब 2:45 बजे वह सेक्टर-35 में पार्टी कर वापस अपने जानकर के घर सेक्टर-42 जाने के लिए एक ऑटो रोका और उस में बैठ गई थी। इसके बाद चालक ने युवती को अकेला देखकर सेक्टर-42 चौक से ऑटो को यूटर्न कर सेक्टर-43 स्थित स्लिप रोड पर ले गया था। उससे दुष्कर्म की कोशिश करने लगा। पीड़िता ने जब इस बात का विरोध किया तो चालक उसे पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद भी युवती उसका विरोध करती रही और जोर से चिल्लाने लगी। इस बीच वहां से सीटीयू बस गुजर रही थी, बस के ड्राइवर ने जब चिल्लाने की आवाज सुनी तो फौरन वह कंडक्टर के साथ युवती के पास पहुंचा, और ऑटो चालक को धर दबोचा था।
3 अप्रैल 2018 :  शेड अलॉटमेंट घोटाले में कांग्रेसी पार्षद बबला को डेढ़ साल कैद
नौ साल पुराने शेड अलॉटमेंट घोटाले में वर्तमान कांग्रेसी पार्षद और माकेर्ंट कमेटी के पूर्व चेयरमैन दविंदर सिंह बबला को जिला अदालत ने डेढ़ साल की सजा सुनाई थी। साथ ही उस पर 35 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। एडीजे अश्वनी कुमार की अदालत ने बबला को आईपीसी की धारा 420, 465, 468 और 471 के तहत दोषी पाया था। इनके तहत उन्हें अधिकतम डेढ़ साल की सजा सुनाई गई थी।  इससे पहले बबला को निचली अदालत ने जुलाई 2014 में एक साल के अच्छे आचरण की गारंटी पर 50 हजार रुपये के मुचलके पर प्रोबेशन पर छोड़ा था। अदालत के इस आदेश के खिलाफ पुलिस ने 19 सितंबर 2014 को ऊपरी कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी। वहीं बबला ने भी इस मामले में आपराधिक अपील दायर की थी। 27 मार्च को अदालत ने बबला की अपील खारिज कर स्टेट की अपील मंजूर करते हुए बबला को कस्टडी में लेने के आदेश दे दिए थे। इससे पहले दो बार 31 मार्च और 2 अप्रैल को उसकी सजा पर फैसला टल गया था। 3 अप्रैल दोपहर सवा 12 बजे ही अदालत ने उसे सजा सुना दी गई थी।  सेक्टर-26 सब्जी मंडी के दुकानदार सूरज प्रकाश आहूजा ने 19 अगस्त 2009 को पुलिस में मामला दर्ज कराया था। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने कहा था कि, 24 जुलाई को हुई शेड अलॉटमेंट नीलामी में बबला ने अनियमितताएं बरतते हुए अपने दस खास लोगों को अलग से शेड अलॉट कर दिए। नियमों के तहत कुल 59 लोगों को शेड अलॉट होने थे, लेकिन जाली कागजात के आधार पर मार्केट कमेटी के तत्कालीन चेयरमैन दविंदर सिंह बबला ने 59 की जगह 69 लोगों को शेड अलॉट कर दिए। शिकायत मिलने के बाद सेक्टर-26 थाना पुलिस में बबला के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 465, 468, 471 के तहत केस दर्ज हुआ था।
26 अप्रैल 2018 : राष्ट्रपति मेडल पाने के बाद रिश्वत मांग देश से धोखा किया’
राष्ट्रपति मेडल मिलना गर्व की बात होती है और ऐसे व्यक्ति से देशभक्त होने की उम्मीद की जाती है। लेकिन, इस केस में सब इंस्पेक्टर (निलंबित) संजीव कुमार शर्मा राष्ट्रपति मेडल मिलने के बाद भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाया गया। ऐसा कर उसने देश के साथ धोखा किया है। उससे देशभक्त होने की उम्मीद थी। ऐसे में वह सजा में नरमी का हकदार नहीं है।’ सीबीआई की विशेष अदालत की जज गगन गीत कौर ने उक्त टिप्पणी 10 साल पहले 50 हजार रुपये रिश्वत मामले में गिरफ्तार तत्कालीन नीलम चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार शर्मा और सेक्टर-17 मार्केट के पूर्व प्रधान सुभाष कटारिया के केस में सुनाए अंतिम फैसले में कहीं। अदालत ने दोनों को आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए दो-दो साल की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया था। मामले में तीसरे आरोपी सब इंस्पेक्टर (रिटायर्ड) रमेश चंद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। 10 साल और 164 सुनवाइयों के बाद आए फैसले में अदालत ने संजीव कुमार शर्मा और सुभाष कटारिया को दोषी करार दिया। केस में कुछ खास पहलू यह हैं कि सीबीआई को चार्जशीट दायर करने में ही पहले दो साल लग गए।
10 अक्तूबर 2018 : एक लाख रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए पूर्व एसपी देसराज को तीन साल की सजा
देश में अपनी तरह के पहले मामले में जिसमें सीबीआई ने एक आईपीसी को ट्रैप केस में एक लाख रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था, सीबीआई की विशेष अदालत ने चंडीगढ़ में छह साल पहले एसपी रहे देसराज सिंह को तीन साल की सजा सुनाई थी। अदालत ने देसराज को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13 (2) आर/डब्ल्यू 13 (1) (डी) के तहत दोषी करार देते हुए एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया था। इससे पहले आईआईटी कानपुर से एमटेक टॉपर देसराज वर्ष 2008 में आईपीएस बना था। देसराज को एजीएमयू कैडर मिला था। 18 अक्तूबर 2012 को सीबीआई ने चंडीगढ़ में तत्कालीन एसपी रहे देसराज को इंस्पेक्टर अनोख सिंह की शिकायत पर उनके सेक्टर-23 स्थित सरकारी आवास से एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। यह रकम अनोख सिंह के खिलाफ चल रही विभागीय जांच में उसे राहत देने की एवज में मांगी गई थी। हालांकि देसराज ने पहले अनोख सिंह से पांच लाख रुपये रिश्वत मांगी थी, लेकिन बाद में सौदा दो लाख रुपये में तय हुआ था। इसकी पहली किश्त के तौर पर एक लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। अनोख सिंह ने इसकी शिकायत सीबीआई से कर दी। शिकायत की पुष्टि होने पर सीबीआई ने ट्रैप लगाकर एसपी देसराज को एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
30 नवंबर 2018 : पंजाब पुलिस में कमांडो तैनात पति की हत्या के मामले में प}ी सहित चार को उम्र कैद
पंजाब पुलिस में बतौर कमांडो तैनात अपने ही पति की हत्या करने के मामले में दोषी प}ी सहित चार को जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के साथ-साथ अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 60-60 हजार रूपए का जुर्माना भी लगाया था । जिला अदालत ने केस में मृतक की प}ी रायपुर कलां निवासी दोषी सुखदीप कौर, वारदात को अंजाम देने में उसका साथ शामिल दोषी राजपूरा के रहने वाले साहिब सिंह, गुरजिंदर सिंह और जगतार सिंह को सजा सुनाई थी।
दोषी सुखदीप कौर ने किसी अन्य से शादी करने की चाह में अपने पति की इस निर्मम हत्या की वारदात को अंजाम दिया था और इस हत्या को पति के लापता होने की बात साबित करने के मकसद से उसके लापता होने की शिकायत खुद पुलिस को दी थी। मौली जागरां थाना पुलिस ने वर्ष 2016 में केस दर्ज किया था। सुखदीप ने वारदात के दिन अपने पति जयवीर के खाने में नींद की गोलियां मिला दी थी जिसके बाद वह बेसुद हो गया था। इसके बाद साहिब व उसके साथी सुखदीप के घर पहुचे थे। सभी ने जयवीर को कार मे डाला और उसे राजपुरा स्थित मनौली ले गए जहां ले जाने के बाद उन्होनें उसे भाखड़ा नदी में फैक दिया था। इसके बाद उसके पकड़े वही झाडियों में फैके थे जबकि उसकी वर्दी जंगल एरियां में फैकी थी। जयवीर का पर्स और मोबाइल घघ्घर नदी में फैक दिया था। पुलिस ने सर्च के तहत जयवीर का शव करनाल में बहने वाली भाखड़ा नदी में बरामद किया था जिसकी पहचान जयवीर के परिजनों ने की थी।

Leave a Reply