अब आढ़तियों को लेबर की भविष्य निधि का पैसा जमा कराना होगा

Chandigarh
By Admin
रीजनल ईपीएफओ कमिश्नर-2 चंडीगढ़ ने दिया फैसला
1 अप्रैल, 2015 से लेबर की भविष्य निधि जमा नहीं हो रही थी, अब उसी तारीख से जमा करवानी होगीचंडीगढ़, 25 अक्टूबर, 2017: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के रीजनल ईपीएफओ कमिश्नर ने पंजाब में मंडियों से फसल की लोडिंग करने वाले श्रमिकों को एक बड़ी राहत देते हुए, उनकी भविष्य निधि को उनके भविष्य निधि खातों में जमा करवाने का आदेश दिया है। इस आदेश पर अमल के लिए ईपीएफओ ने पंजाब सरकार की सभी प्रमुख खाद्य खरीद एजेंसियों को निर्देश जारी किए हैं। खाद्य एजेंसियों को आढ़तियों के माध्यम से इस आदेश को लागू करवाने के लिए एक माह का समय दिया गया है। 

इस मामले में राम सिंह मटरां एवं अन्य ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के कमिश्नर के समक्ष शिकायत दी थी कि 1 अप्रैल, 2015 से उनके श्रमिक आढ़तियों के साथ काम करते हुए सरकारी खरीद के अनाज की लोडिंग, तुलाई और भरवाई और सिलाई आदि कर रहे हैं, जिसका भुगतान मंडी बोर्ड द्वारा तय की गई दरों पर खरीद एजेंसियों द्वारा लेबर भुगतान के तौर पर आढ़तियों को किया जा रहा है लेकिन उनकी भविष्य निधि नहीं जमा की जा रही है।

जबकि उससे पहले ये श्रमिक खाद्य एजेंसियों के ठेकेदारों के साथ काम करते थे और तब उनकी भविष्यनिधि कट कर उनके ईपीएफओ खातों में जमा होती थी। पंजाब सरकार ने ये काम आढ़तियों को दे दिया था और तभी से उनकी भविष्य निधि जमा होनी बंद हो गई। ऐसे में उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा जोखिम में आ गई है। ऐसे में किसी श्रमिक की मृत्यु होने पर उसके परिवार को बनते पैंशन लाभ भी नहीं मिल पाए और उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा खतरे में आ चुकी है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के रीजनल पी.एफ.कमिश्नर-2, रीजनल ऑफिस चंडीगढ़ शशि भूषण कुमार ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि श्रमिकों की भविष्य निधि जमा करवाना ईपीएफ और एमपी एक्ट 1952 के तहत आवश्यक है। ऐसे में 1 अप्रैल, 2015 से श्रमिकों के बनते ईपीएफ को एक महीने के अंदर इनके ईपीएफ खातों में जमा करवाया जाए।

1.5 लाख श्रमिकों का भविष्य होगा सुरक्षित
फैसले का स्वागत करते हुए राम सिंह मटरां, पंजाब प्रधान, भवानीगढ़ पल्लेदार मजदूर दल ने कहा कि ईपीएफओ के इस फैसले से पंजाब भर से 1.5 लाख से अधिक श्रमिकों पर असर होगा और उनका भविष्य सुरक्षित होगा। बीते दो साल से ये श्रमिक अपने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर आशंकित थे और उनके परिवारों पर भी आर्थिक सुरक्षा का संकट छाया हुआ था। ईपीएफओ के इस फैसले से उन्हें राहत मिल सकती है।

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