#रावी पर शाहपुर कंडी डैम प्रौजेक्ट बाबत पंजाब और जम्मू-कशमीर के बीच नया समझौता

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By Admin

चंडीगढ़, 4 मार्च(अपडेट पंजाब): पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच शाहपुर कंडी डैम प्रौजेक्ट जोकि रावी नदी पर रणजीत सागर डैम (थीन डैम) पर नीचे की आेर निर्मित किये जाने का प्रस्ताव है, से संबंधित कई लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिये एक समझौता किया गया है। पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सचिव स्तर पर हुये इस समझौते को संपूर्ण करने में भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय ने बड़ी भूमिका अदा की है और मंत्रालय नई दिल्ली में हुये समझौते पर सह-हस्ताक्षरी भी है।
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि पंजाब हमेशा हीं रिपेरियन राज्यों के बीच जल स्त्रोतों की एक समान बांट का पक्षधर रहा है। और उनको अब जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा इस संबंधी औपचारिक स्वीकृति का इंतजार रहेगा। पंजाब के शिष्टमंडल का नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं सिंचाई) के बी एस सिद्धू ने किया जबकि जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा सचिव सिंचाई सौरव भगत शामिल हुये। इस मुद्दे संबंधी भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव डॉ. अमरजीत सिंह की उपस्थिति में बातचीत हुई जबकि जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव बी आर शर्मा और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत ब्यास ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग द्वारा बातचीत में हिस्सा लिया।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि शाहपुर कंडी डैम प्रौजेक्ट 1979 में उस समय के पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और जम्मू-कश्मीर के उस समय के मुख्यमंत्री शेख अब्दूला के बीच हुये एक समझौते तहत वजूद में आया। रणजीत सागर डैम के पूरा होने के पश्चात शाहपुर कंडी डैम प्रौजेक्ट वर्ष 2009 में राष्ट्रीय प्रौजेक्ट घोषित किया गया था और इस पर अप्रैल 2013 में कार्य आरंभ कर दिया गया था परंतु कुछ अनसुलझे रह गये मुद्दों के कारण जम्मू-कश्मीर सरकार के कहने पर इसका कार्य रोक दिया गया था।
प्रवक्ता ने और जानकारी दी कि ताजा समझौता वर्ष 1979 में हुये समझौते पर पुन: मौहर लगाता है और दोनो राज्यों के मुख्य अभियंतों में बनी सहमति के मद्देनजर करेस्ट का स्तर 398.40 मीटर किये जाने को मंजूरी देता है। इसी प्रकार ही भारत सरकार के पुणे में स्थित सैंट्रल वॉटर एंड पॉवर रिसर्च स्टेशन द्वारा हैड रैगूलेटरों के करेस्ट का स्तर पता लगाने के लिये विस्तृत अध्ययन किया जायेगा ताकि जम्मू-कशमीर राज्य को उसके हिस्से का 1150 क्यूसिक पानी मिलना यकीनी बनाया जा सके हालांकि पंजाब के सिंचाई विभाग द्वारा इस प्रौजेक्ट को लागू किये जाने का कार्य जारी रहेगा परंतु एक तीन पक्षीय निगरान टीम केंद्रीय जल आयोग के सदस्य की अध्यक्षता में प्रत्येक तिमाही में एक बार बैठक करके इस प्रौजेक्ट के निर्माण समझौते अुनसार होना यकीनी बनायेगी।
प्रवक्ता ने बताया कि कानूनी अथॅारटियों से स्वीकृति मिलते ही पंजाब सरकार ने लैंड एक्वेजेशन एक्ट तहत भूमि अधिग्रहन में बढ़ौतरी के बकाया दावों की तेजी से अदायगी करना कबूल किया। वर्ष 1979 के समझौते में दर्ज किये अनुसार थीन डैम/रणजीत सागर डैम द्वारा पैदा की जा रही कुल बिजली का 20 प्रतिशत हिस्सा जम्मू-कश्मीर को आपसी सहमति से 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से तत्काल प्रभाव से मुहैया करवाया जायेगा जोकि सैंट्रल इलैक्ट्रीसिटी रैगूलेटरी कमिशन द्वारा इन दरों की पुष्टि किये जाने का मौताज होगा। वर्ष 2004 के पंजाब टर्मीनेशन ऑफ वॉटर एग्रीमैंटस एक्ट बनाये जाने के पश्चात वर्ष 1979 के समझौते की वैधता के प्रति जम्मू-कश्मीर राज्य की शंकाआें को दूर करने के लिये फैसला किया गया कि दोनो राज्यों के बीच एक नये समझौते पर हस्ताक्षर किये जाये ताकि किसी भी पक्ष के मन में यह संदेह ना रहे।
पंजाब सरकार ने रावी नहर का शेष 2.3 कि.मी हिस्सा और कश्मीर नहर के लिये साइफन निर्माण की प्रतिबद्धता भी दोहराई जिसका कार्य शाहपुर कंडी डैम के निर्माण के साथ ही चलेगा शेष और सभी दावे वर्ष 1979 के समझौते के कलाज 16 तहत विचोलगी प्रक्रिया से सुलझायेंगे। सचिव स्तर के इस समझौते की पुष्टि संबंधित राज्यों द्वारा की जायेगी और साइट पर कार्य उससे तुरंत बाद पुन: आरंभ होगा। पंजाब की प्रतिनिधिता करने वाले शिष्टमंडल ने सचिव सिंचाई के एस पन्नू, मुख्य इंजीनियर /ऑनरेरी सलाहकार हरविंदर सिंह और कार्यकारी इंजीनियर शाहपुर कंडी डैम सुधीर गुप्ता भी उपस्थित थे।

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