श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व का राजनीतिकरन करने के लिए पंजाब कांग्रेस की तरफ से अकालियों की तीखी आलोचना

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By Admin

चण्डीगढ़, 13 फरवरी:

शिरोमणि अकाली दल की तरफ से श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के शुभ अवसर का लगातार राजनीतिकरन करने के शर्मनाक कार्य किये जा रहे है और इस के नेता सुखबीर सिंह बादल की तरफ से प्रकाश पर्व स बन्धित समागमों के प्रबंधों संबंधीे चर्चा करने के लिए बुलाई आरगनाईजिंग कमेटी की पहली मीटिंग का बाइकाट किये जाने की पंजाब कांग्रेस ने तीखी आलोचना की है। कांगे्रसी नेताओं सुखजिन्दर सिंह, प्रगट सिंह, हरप्रताप सिंह अजनाला, तरसेम सिंह डी.सी, बरिन्दर सिंह पाहड़ा और सुख सरकारिया ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि सरकार द्वारा विशेष न्योैता भेजे जाने के बावजूद सुखबीर सिंह बादल सोमवार को रखी गई प्रकाश पर्व के प्रबंधों संबंधीे मीटिंग में नहीं पहुँचे और न ही उसने मीटिंग में न आ सक ने का बाद में कोई पछतावा किया है । कांगे्रसी नेताओं ने कहा कि इस मीटिंग की अध्यक्षता मु यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की थी जिस में हमारे जीवन काल में आने वाली सब से अधिक सौभाग्यपूर्ण पल स बन्धित मनाए जाने वाले समागमों की विस्तारपूर्वक रूप रेखा बारे विचार किया गया था । उन्होंने कहा कि इस अहम विचार – विमर्श से दूर रह कर अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल स्वयं ही पंजाब के लोगों की नजऱों में गिर गए हैं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने कहा कि पंजाब के लोगों, वास्तव में दुनिया भर में बसे पंजाबियों के लिए पहले सिख गुरू सब से उपर है। हालाँकि अकाली भी अपने आप को सिख धर्म के रखवाला होने का दावा करते हैं परन्तु उन्होंने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि उनको भाईचारे के धार्मिक विचारों को प्रफुल्लित करने और उनकी सुरक्षा करने में कोई रूचि नहीं है।

नेताओं ने आगे कहा कि सच्चाई यह है कि सुखबीर ने बैठक में उपस्थित न हो कर माफी नहीं माँगी जिस से स्पस्ट होता है कि यह बाइकाट अकाली नेता की तरफ से जान बुझ कर किया गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान और विरोधी पक्ष के अन्य नेताओं ने भी मीटिंग में उपस्थित न हो कर ग़ैर -जि़ मेदारी वाले व्यवहार का ही प्रगटावा किया है। कांग्रसी नेताओं ने कहा कि इस मामले में अकालियों की बुरी सोच का इस बात से ओैर भी स्पष्ट प्रगटावा हो जाता है कि पार्टी प्रवक्ता ने दावा किया है कि सुखबीर इस लिए मीटिंग में नहीं गया क्येांकि अकाली दल को कांग्रेस से कोई न्योैता नहीं मिला।उन्होंने आगे कहा क्या यह कांग्रेस की मीटिंग थी जिस के लिए न्योैता पत्र भेजे जाने चाहिए थे? उन्होंने कहा कि इस स बन्ध में विशेष न्योैता शिरोमणि अकाली दल के प्रधान को सही जगह से दिया गया था । कांगे्रसी नेताओं ने आगे कहा कि अकालियों ने जो भी कुछ किया है उसके उलट तथ्य यह हैं कि यह समारोह राजनैतिक पार्टियाँ को शामिल करने वाला नहीं था। इसके साथ अकालियों की एक बार फिर घमंडी मानसिकता का दिखावा होने के साथ साथ उनकी धर्म की राजनीतिकरण करने वाली प्रवृत्ति का खुलासा हुआ है ।