मुख्यमंत्री ने एक मुश्त कृषि ऋण माफी की माँग फिर केंद्र के समक्ष उठाई

Punjab
By Admin
सामाजिक-आर्थिक अशांति से बचने के लिए तुरंत दख़ल देने के लिए प्रधान मंत्री को पत्र लिखा
चंडीगढ़, 17 मई:
किसानों की बिगड़ती स्थिति और किसानों द्वारा लगातार आत्महत्याओं पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बार फिर किसान समुदाय की मुश्किलों को हल करने के लिए प्रधानमंत्री को एक मुश्त कृषि ऋण माफ करने का ऐलान करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण इलाकों में सामाजिक-आर्थिक अशांति से बचने के लिए भारत सरकार के तुरंत दख़ल की माँग की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ऋण माफी योजना संबंधी राज्य सरकार की तरफ से बार -बार की गई विनतियों के बावजूद इस सम्बन्ध में कोई उत्साहजनक स्वीकृति नहीं मिली। उन्होंने आजीविका के साथ किसी भी तरह का समझौता न किये जाने को यकीनी बनाने के लिए एक मुश्त राहत की माँग की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋण के निरंतर दबाव के कारण किसानों की आत्महत्याओँ की संख्या बढ़ रही है और उनमें बड़े स्तर पर असंतोष फैल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान दिए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कृषि ऋण माफी संबंधी प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाना चाहिए और किसानों की मुश्किलें घटानीं चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए कृषि सैक्टर को ज़्यादा लचीला और आर्थिकता को पुनरूत्थानशील बनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने लिखा है कि सूबा सरकार ने अपने स्तर पर सभी छोटे और सीमांत किसानों को 2 लाख रुपए के संस्थाई कजऱ्े की माफी की राहत मुहैया करवाने का फ़ैसला किया था। उन्होंने कहा कि सूबा सरकार की तरफ से 8.75 लाख किसानों जिनके 10.21 लाख कृषि ऋण खाते हैं, को तकरीबन 9500 करोड़ रुपए की कुल कजऱ् राहत मुहैया करवाई जायेगी। उन्होंने कहा कि अब तक 2.02 लाख किसानों को 999.67 करोड़ रुपए की कजऱ् राहत दी जा चुकी है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह पहलकदमी किसानों पर पैदा हुए दबाव को कम करने की एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि कृषि सैक्टर को उच्च विकास और वृद्धि में लाने से ही देश के किसानों को मानक जीवन मुहैया करवाया जा सकता है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर किसानों को एक मुश्त कृषि ऋण माफी दिए जाना ज़रूरी है।
राष्ट्रीय खाद्यसुरक्षा में पंजाब के किसानों की तरफ से दिए गए योगदान का जि़क्र करते हुए उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के दौरान रिकार्ड समय में किसानों ने गेहूँ और धान की उत्पादकता और उत्पादन बढ़ाया है और देश के लोगों को भुखमरी से निजात दिलाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में इन किसानों ने राज्य के संस्थागत बुनियादी ढांचे और निवेश तथा उपयुक्त नीतियों के सहयोग से नई तकनीकें अपनाई गई हैं जिससे अधिक से अधिक अनाज पैदा किया जा सके। हालाँकि इन फसलों की मौजूदा प्रौद्यौगिकी की उपजाऊ क्षमता का पूरा लाभ उठाया जा चुका है और अब यह विकासहीनता के नज़दीक पहुँच चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन-चार सालों में मौसमी तबदीलियों के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति और खऱाब हुई है। वर्ष 2014 की खरी$फ की फ़सल के दौरान सूखा पडऩे के कारण किसानों को अपनी धान की फ़सल के रखरखाव के लिए अतिरिक्त ख़र्च करना पड़ा था। इसी तरह वर्ष 2014 -15 की रबी ॠतु के दौरान असामयिक वर्षा का गेहूँ की पैदावार पर बुरा प्रभाव हुआ जिससे किसानों को गेहूँ के झाड़ का 10 -15 प्रतिशत की कमी सहनी पड़ी थी। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बताया कि वर्ष 2015 की खरी$फ की फ़सल ॠतु के दौरान फिर सफ़ेद मक्खी के हमलों से नरमे की फ़सल बर्बाद हो गई थी और इस दौरान ही आलू, गन्ना और बासमती के उत्पादकों को फसलों की कीमतें बहुत कम होने का खाम्याजा भुगतना पड़ा था।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इस दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य में किया गया विस्तार भी कृषि लागतों की कीमतों में हुई वृद्धि के अनुकूल नहीं थे। इसके निष्कर्ष के तौर पर ही किसानों पर कजऱ्े का बोझ बढ़ता गया जिससे पैदा हुई निराशा किसान आत्महत्याओँ के रूप में सामने आई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे भारत सरकार ने वर्ष 2003 -04 में तीन सालों में कृषि के लिए संस्थागत कजऱ् दोगुना करने का प्रोग्राम अच्छी नीयत से शुरू किया था और लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बैंकों ने खुले कजऱ्े दिए और यहाँ तक कि कई बार तो आर्थिक योग्यता और बैंकों की आचार नीति को भी दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके निष्कर्ष के तौर पर 31 मार्च 2017 तक पंजाब के किसानों की तरफ बैंकों की अग्रिम देनदारी बढक़र लगभग 72,771 करोड़ रुपए हो गई जो राज्य की कृषि की जी.डी.पी. की अपेक्षा भी अधिक है।

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