,पंजाब में  9800 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव,वर्ष 2017-18 में पंजाब को 8000 करोड़ की वित्तीय सहायता दी

Punjab
By Admin

दीपक कुमार, मुख्य महाप्रबन्धक, नाबार्ड पंजाब ने वर्ष 2017-18 के वित्तीय आंकड़ों को जारी करते हुए कहा कि नाबार्ड,विकास वित्तीय संस्थान ने पंजाब में कृषि और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. संक्षेप में नाबार्ड,विकास बैंक द्वारा पंजाब राज्य में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए विभिन्न हितधारकों को रूपये8000 करोड़ मंजूर और संवितरित किए गए.नाबार्ड ने कृषि में पूंजी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए, सहभागी बैंकों को रूपये 2249.67 करोड़ का पुनर्वित्त प्रदान किया.सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा किसानों को रियायती ब्याज दर पर फसल ऋण के संवितरण के लिए अल्पावधि ऋण के तहत रूपये5258.26 करोड़ का पुनर्वित्त प्रदान किया गया.

श्री दीपक कुमार ने उल्लेख किया कि नाबार्ड आरआईडीएफ के तहत राज्य सरकार को ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है.ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास निधि (आरआईडीएफ) के अंतर्गत राज्य में महत्वपूर्ण ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिए राज्य सरकार को      रूपये444.82 करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की गई.आरआईडीएफ के तहत मंजूर प्रमुख परियोजनाओं में, राज्य के ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी,मिडल,हाई, सी.सेकेंडरी स्कूलों के लिए 6571 अतिरिक्त क्लास रूम, ग्रामीण हाई और सी.सेकेंडरी स्कूलों के लिए 1500 आर.ओ.सिस्टम,फजिल्का जिले के अबोहर क्षेत्र में पनजावा-मलुकपुर नहर का नवीनीकरण / पुनर्वास,अर्नियाला बांध का निर्माण, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर,फजिल्का जिले, मिल्कफ़ेड (बस्सी पठाना मेगा डेयरी आदि) में मौजूदा बहु-ग्राम ग्रामीण पाइप जल आपूर्ति योजनाओं का उन्नयन / द्विभाजन शामिल है.

श्री दीपक कुमार ने इंगित किया कि पंजाब में पैडी स्ट्रा बर्निंग एक बड़ा मुद्दा है, इससे न केवल मिथेन,कार्बनडाइऑक्साइड,नाईट्रोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है बल्कि इससे दूध,बागवानी की पैदावार और कृषि उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.राज्य में पैडी स्ट्रा बर्निंग पर नियन्त्रण के लिए नाबार्ड ने पार्टनर एजेंसियों जैसे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना और पंजाब के विभिन्न जिलों में अन्य गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिल कर कुछ नए कदम उठाए हैं.इस पहल में 7 जिलों में 1900 किसानों के लगभग 4600 एकड़ क्षेत्र शामिल थे, और वहां पैडी स्ट्रा बर्निंग की एक भी घटना नहीं हुई. इससे प्रेरित होकर आगामी सीजन में10000 एकड़ से अधिक का क्षेत्र कवर करने की संभावना है.

मुख्य महाप्रबन्धक, नाबार्ड पंजाब ने इंगित किया कि वित्तीय समावेशन फंड के तहत वित्तीय समावेशन नाबार्ड के लिए एक बड़ा काम है,नाबार्ड ने बैंकों को बैंकिंग सूचना प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण को मजबूत बनाने के माध्यम से राज्य में वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ और गहन करने के लिए    रूपये11.80 करोड़ की  अनुदान सहायता मंजूर की है.वित्तीय साक्षरता के प्रचार-प्रसार के लिए सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, पंजाब राज्य सहकारी बैंक, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक,पटियाला और मालवा ग्रामीण बैंक को सौर ऊर्जा युक्त एटीएम, माइक्रो एटीएम, पीओएस मशीन और एलईडी टीवी जैसी सुविधाओं वाली मोबाइल वैन की खरीद के लिए वित्तीय सहायता मंजूर की गई.सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा रुपे किसान कार्ड जारी करने के लिए, 6885 डिजिटल कैंप के आयोजन, ग्रामीण स्वयं रोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (आरएसईटीआई / रुडसेटी) और राज्य में वित्तीय साक्षरता केंद्रों को सहायता प्रदान करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई.

श्री दीपक कुमार ने यह भी इंगित किया कि पंजाब में, राज्य के सभी 22 जिलों के 5000 गांवों में जल अभियान 2017 (जल जीवन है) का आयोजन किया गया. इस अभियान के मुख्य आकर्षणों में लोगों को सिंचाई पद्धतियों, भूजल पुनर्भरण और बेहतर कृषि विज्ञान और सिंचाई (प्रति बूंद अधिक फसल) प्रथाओं को अपनाने में सामुदायिक भागीदारी शामिल थी.

इसके अतिरिक्त नाबार्ड ने राज्य में 22 नए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देने के प्रस्तावों को मंजूरी दी है.ये एफपीओ पूरी तरह से सदस्य किसानों के स्वामित्व में होंगे और इन पर कृषि इनपुट की खरीद एवं उनके उत्पाद के विपणन सम्बन्धी किसानों के हितों की देखभाल की जिम्मेदारी होगी. माइक्रो फाइनेंस के तहत वर्ष 2017-18 के दौरान 3176 एसएचजी सेविंग लिंक्ड और 2151 एसएचजी क्रेडिट लिंक्ड थे. संयुक्त देयता समूह वित्तपोषण बिना किसी कोलेटरल के वित्तपोषण का एक सुरक्षित एवं विश्वसनीय मोड है. वर्ष 2017-18 के दौरान बैंकों द्वारा कुल 7205 संयुक्त देयता समूहों को वित्तपोषित किया गया अब संयुक्त देयता समूहों की  संचयी संख्या 31210 हो गई है. नाबार्ड ने प्रमोट किए गए और बैंकों से लिंक्ड एसएचजी को समय पर एवं परेशानी रहित ऋण उपलब्ध कराने के लिए रियल टाइम डेटा आधारित ई-शक्ति प्रोजेक्ट शुरू किया है. प्रायोगिक आधार पर पंजाब के एक जिले पटियाला में डिजिटलीकरण का कार्यान्वयन किया जा रहा है, जहां 31 मार्च 2018 की यथा स्थिति 1110 एसएचजी का डिजिटलीकरण कर दिया गया है.

इसके अतिरिक्त श्री दीपक कुमार, मुख्य महाप्रबन्धक, नाबार्ड ने संकेत दिया कि वर्ष 2018-19 के दौरान नाबार्ड द्वारा पंजाब में रूपये9800 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है.

नाबार्ड राष्ट्रीयस्तर पर

नाबार्डद्वारा पुनर्वित्त के माध्यम से दीर्घकालिक ऋण को बढ़ावा देने पर जोर देने से इस वर्ष पुनर्वित्त बकाया राशिरूपये1,22,688 करोड़ हो गई, जो कि पिछले वर्ष से 17% अधिक है. वर्ष 2017-18 के दौरान रूपये10 लाख करोड़ के लक्ष्य के समक्ष वास्तविक कृषि ऋण प्रवाह रूपये10.46 लाख करोड़ रहा. आधार स्तर पर ऋण उपलब्ध कराने में  नाबार्ड के पुनर्वित्त ने उत्प्रेरक की भूमिका निभाई. नाबार्ड द्वारा प्रदत्त कुल पुनर्वित्त संवितरण रूपये1,45,061 था (दीर्घावधि :रूपये65,240 करोड़ + अल्पावधि : रूपये79,821 करोड़) जोकि कुल आधार स्तरीय ऋण का लगभग 14% है. विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का वित्तपोषण ग्रामीण भारत के विकास के सबसे प्रभावशाली थीम के रूप में उभरा है. पिछले चार वर्षों में, नाबार्ड ने ग्रामीण भारत के इन्फ्रा फाइनेंस सेक्टर में एक महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में अपनी भूमिका को परिभाषित किया है. वर्ष के दौरान नाबार्ड के आरआईडीएफ और एलटीआईएफ के तहत बकाया ऋण रूपये1,30,509 करोड़ हो गए. साथ में, नाबार्ड ने ग्रामीण क्षेत्रों को लाभान्वित करने वाले सीधे तौर पर दिए जाने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर ऋण प्रदान करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है. नाबार्ड आधारभूत विकास सहायता (एनआईडीए) के अंतर्गत बकाया ऋण पिछले वर्ष रूपये4948 करोड़ थे जो इस वर्ष बढ़ कर रूपये7,242 करोड़ हो गए. वेयरहाउस वित्तपोषण में नाबार्ड के बकाया ऋणरूपये4,296 हो गए जबकि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए बकाया ऋण रूपये239 करोड़ रहे. नाबार्ड ने राष्ट्रीय ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास प्राधिकरण (एनआरआईडीए) को रूपये9,000 करोड़ के ऋण के माध्यम से प्रधान मंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमए-जी) को वित्तीय सहायता प्रदान की. वर्ष 2017-18 के दौरान इस राशि में से रूपये7,329 करोड़ की राशि का उपयोग किया गया.

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