जाखड़ ने अकाली दल से पूछा, बादल सरकार ने अपने कार्यकाल में किसानी कर्ज माफी के लिए क्या किया

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By Admin

अकाली दल बताए कि क्या वह किसानी कजऱ् माफी के पक्ष में या विरोध में-सुनील जाखड़
बेअदबी की घटनाओं की जांच से अकाली नेता क्यों घबराए
चंडीगढ़, 12 जनवरी,
पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रधान और गुरदासपुर से लोक सभा सदस्य  सुनील जाखड़ ने शिरोमणी अकाली दल के नेताओं से पूछा है कि जब राज्य में अकाली भाजपा गठबंधन की सरकार थी तो उसने किसानी कर्जे की माफी के लिए क्या किया था।
श्री जाखड़ ने कहा कि अब अकाली दल के नेता राज्यपाल के पास मिल कर किसानी कर्जे की बात कर रहे हैं जब कि उन्होंने अपनी सरकार थी तो उन्होंने किसानों के लिए कुछ नहीं किया। जाखड़ ने अकाली नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि वह राज्यपाल को मिलने की बजाय अपनी हिस्सेदार पार्टी का नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पास जा कर प्रधान मंत्री  नरिन्द्र मोदी से किसानी कर्जे माफी के लिए मदद क्यों नहीं माँग लेते।
जाखड़ ने अकाली कार्यकाल के समय पर खुलासा करते हुए कहा कि बादल सरकार ने मार्च 2016 में पंजाब सेटलमेंट आफ ऐग्रीकल्चर इनडैबटनैस बिल 2016 पास किया था परन्तु बिल के पास करने के बाद यह सरकार पुरी तरह से हाथ पर हाथ रख कर बैठी रही और जिला और राज्य स्तर पर बनने वाले कजऱ् निपटारा ट्रिब्यूनलों के गठन के लिए कुछ नहीं किया। छह महीने बाद सिंतबर 2016 में 22 में से मात्र 5 जिलों में जिले ट्रिब्यूनल के चेयरमैन लगाए परन्तु न तो उन्होंने को कोई स्टाफ दिया और न ही इस संबन्धित ओर कोई प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उन्होंने कहा कि इस से अकाली दल की अपनी किसानी कर्जे के बारे पहुँच का पता लगता है कि अकाली दल के नेता किसानों को एक वोट बैंक से अधिक कुछ नहीं समझते और किसानों के नाम और अपनी राजनीति चमकाने वालों ने वास्तव में किसानों के लिए अपनी सरकार समय पर कुछ नहीं किया। जब , अब कैप्टन सरकार किसानी कर्जा क्षमा कर रही है तो वही अकाली दल अब किसानों को गुमराह कर रहा है। परन्तु साथ ही श्री जाखड़ ने कहा कि पंजाब के बुद्धिमान किसान अब अकाली दल की दोगली नीति को समझ चुके हैं और वह जानते हैं कि पंजाब सरकार उनकी आर्थिक उन्नति के वचन को पूरी तरह निभाएगी।
सुनील जाखड़ ने शिरोमणी अकाली दल की तरफ से किसानी कर्जे के नाम और की जा रही संकुचित राजनीति की तीखी अलोचना करते कहा कि यदि जरूरतमंद किसानों के कजऱ्े क्षमा हो रहे हैं तो अकाली दल को इस में क्या परेशानी है। उन्होंने कहा कि अब तक तो विरोधी पार्टी यह कह रही थी कि सरकार कजऱ्े क्षमा नहीं कर रही और अब जब चरणमय ढंग से किसानी कजऱ्े क्षमा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है तो अकाली दल को लगने लगा है कि उस के पास तो अब विरोध का कोई मुद्दा ही नहीं बचा है। श्री जाखड़ ने कहा कि अकाली दल जो कि केंद्र में सत्ताधारी एन.डी.ए. सरकार में हिस्सेदार भी है को यह साफ़ करना चाहिए कि वह किसानों की कजऱ् माफी चाहते हैं या नहीं। श्री जाखड़ ने कहा कि एक तरफ़ अकाली दल की हिस्सेदारी वाली केंद्र सरकार ने पिछले तीन सालों में किसान कजऱ् माफी के लिए एक पचास पैसे का सिक्का नहीं खर्च किया वहीं दूसरी तरफ़ पंजाब की कैप्टन सरकार ने कजऱ् माफी की प्रक्रिया शुरू की है ।
जाखड़ ने कि बेअदबी की दुखदायी घटनाओं की जांच कमिशन की तरफ से की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच कमीशन की रिपोट आने से पहले ही अकाली दल को पता नहीं किस बात का डर सता रहा है कि इसके नेता अब इस मामलो की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल के पास अब जब कोई मुद्दा नहीं बचा है ।