कैप्टन अमरिंदर यादविंदरा पब्लिक स्कूल के प्लैटिनम जुबली समारोह में हुए शामिल 

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By Admin
पटियाला, 2 फरवरी: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आज यहां यादविंदरा पब्लिक स्कूल के अध्यापकों, विद्यार्थियों और इस स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर चुके पुराने विद्यार्थियों के साथ संस्था की प्लैटिनम जुबली के अवसर पर करवाये गये शानदार सांस्कृतिक समारोह में शामिल हुए।
अपने पिता महाराजा यादविन्दर सिंह की तरफ से स्थापित किये गए इस स्कूल में जब मुख्यमंत्री पहुंचे तो विद्यार्थियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस अवसर पर कैप्टन अमरिंन्दर के साथ उन की पत्नी श्रीमती परनीत कौर और डा. कर्ण सिंह, जो इस स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं, भी उपस्थित रहे।
इस मौके कैप्टन अमरिन्दर सिंह के भाई और स्कूल के बोर्ड ऑफ गवर्नर के चेयरमैन राजा मालविन्दर सिंह ने कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्था की स्थापना उनके पिता जी की दूरदृष्टि को दर्शाती है। देश के बंटवारे के कठिन दौर में उनके पिता की ओर से स्कूल स्थापित करने के महान प्रयास का स्मरण करते हुए राजा मालविन्दर सिंह ने स्कूल के सबसे पुराने विद्यार्थियों में से एक जस्टिस एस. एस. सोढी का जिक्र किया, जो 1949 में यहाँ से पास आउट हुए, जिन्होंने बीते वीरवार  को स्कूल की स्थापना के समारोहों का हिस्सा लिया था।
राजा मालविन्दर सिंह ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में स्कूल ने कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं और आज इसका नाम देश के पहली पंक्ति के प्रतिष्ठित स्कूलों में आता है और यह संस्था अपनी तरक्की और प्रसिद्धि का सफर बदसतूर जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि स्कूल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के अलावा खेल के क्षेत्र में नये क्षितिज कायम किये जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्था की परंपराओं अनुसार मुताबिक उच्च नैतिक मुल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
स्कूल के छात्र रहे व पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्यार्थी डा. कर्ण सिंह ने महाराजा यादविन्दर सिंह को श्रद्धाँजलि अर्पित करते हुए उन्हें दूरदर्शी और कभी ना भुलाए जाने वाली महान शख्सियत करार दिया। वाईपीएस की विलक्षणता को दर्शाते हुए उन्होंने इस की बहुपक्षीय प्राप्तियों की प्रशंसा की और बाल मन को अज्ञानता, कट्टरवाद और अहंकार से दूर रखने के लिए शिक्षा के महत्व पर बल दिया।
डा. कर्ण सिंह ने बच्चों को नये भारत के निर्माता बताते हुए ज्ञान का प्रयोग कर अपने तन मन का निर्माण करने का आह्वान किया जिससे उनके सपनों के देश का सृजन किया जा सके। निरंतर वार्तालाप की महत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने बच्चों से मुखातिब होते हुए कहा कि कभी भी सवाल पूछने से झिझको मत और टीम वर्क से अपने सामाजिक हुनर को निखारने की ओर अधिक ध्यान दें क्योंकि यही दक्षता ही जिंदगी के मुश्किल दौर में से विजयी हो कर निकालने में सहायक सिद्ध होगी।
पब्लिक स्कूलों में छोटे बच्चों का बड़े बच्चों की तरफ से मजाक उड़ाने और उन्हें तंग परेशान करने की पेश चुणौतियों का जिक्र करते डा. कर्ण सिंह ने कहा कि बच्चों के साथ उनके सीनियरों की तरफ से ऐसा व्यवहार करना हमारी परंपरा का हिस्सा नहीं बल्कि यह कायरता की निशानी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि शिक्षा के लिए मिले इस अवसर के दौरान वे अपने व्यक्त्तिव को सुदृढ़ करें, साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अनुशासन की भावना पैदा करने के साथ साथ संविधान में दर्ज मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के महत्व से अवगत करवाने पर भी बल दिया।
समाज में बढ़ रही असहनशीलता का हवाला देते हुए डा. कर्ण सिंह ने विद्यार्थियों को कट्टरवाद से दूर रखने प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा कि जो भी धर्म कट्टरवाद का शिकार होता है, वह धर्म अंत में समाप्त हो जाता है।
पूर्व कपूरथला रियासत के राजा ब्रिगेडियर ( सेवा मुक्त) और महावीर चक्र विजेता सुखजीत सिंह ने वाई. पी. एस. की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में पैदा किये गए अनमोल रत्नों के लिए संस्था की भरपूर प्रशंसा करते हुए विद्यार्थियों को सीखने की कला अपनाने की अपील की, जिससे वह अपने सपनों और निर्धारित लक्ष्यों मुताबिक मंजिलों तक पहुँच सकें।
स्कूल के डायरैक्टर मेजर जनरल (सेवा निवृत) संजीव वर्मा ने स्कूल की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी और विद्या, खेल और अन्य गतिविधियों में संस्था की उलब्धियों पर प्रकाश डाला। इससे पहले स्कूल के विद्यार्थियों ने गिद्दा, भंगड़ा, शास्त्रीय संगीत, गु्रप नृत्य सहित कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की दिलकश प्रस्तुति दी और स्कूल का गीत शानदार तरीके से गाया।
इसके बाद डा. कर्ण सिंह ने मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ वाई. पी. एस. स्टेडियम में राजा सुरिन्दर सिंह की याद में नालागढ़ स्कवैश कोर्ट का उद्घाटन किया। इस से पहले वीरवार को स्कूली विद्यार्थियों ने स्कूल के परंपरागत  खेल ‘पागल जिमखाना गेमज’ स्वादिष्ट भोजन आदि का आनंद लिया। जबकि 11वीं के पुराने और मौजूदा 11वीं के विद्यार्थियों के बीच दोस्ताना क्रिकेट मैच खेला गया। इस के अतिरिक्त स्कूल की सलाना परंपराएं भी निभाई गई और हरपाल टिवाणा कला केंद्र में ’साउंड आफ म्युजिक’ नाटक खेला गया और कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से पुराने यादविन्दरियन और अन्य मेहमानों के लिए रात का भोजन करवाया गया।
इस अवसर पर उपस्थित प्रतिष्ठित लोगों में पूर्व कानून मंत्री और सीनियर कांग्रेसी नेता श्री अश्वनी कुमार, इंडियन ओलंपियक एसोसिएशन के आजीवन प्रमुख राजा रणधीर सिंह, कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के अलावा स्कूल की गवर्निंग बॉडी के सदस्य शामिल रहे। मुख्य मंत्री के साथ उनके सीनियर सलाहकार लैफ. जनरल रिटायर्ड टी. एस. शेरगिल, मीडिया सलाहकार श्री रवीण ठुकराल, मुख्य मंत्री के सुपुत्र रणइन्दर सिंह, रानी हरप्रिया कौर, विधायक विजयइंद्र सिंगला, मुख्य मंत्री के सुरक्षा सलाहकार श्री खूबी राम, मेजर अमरदीप सिंह, कैप्टन अमरजीत सिंह जेजी, मेजर जनरल जी. एस. रंधावा, रमनीत इंद्र कौर, स्कूल के बरसर विक्रम सिंह, पूर्व डी. जी. पी. ए. एस. गिल, आई. जी पटियाला स. ए. एस. राय, डी. आई. जी. डा. सुखचैन सिंह गिल, डिप्टी कमिशनर श्री कुमार अमित, एस. डी. एम. पटियाला स. अनमोल सिंह धालीवाल सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
जिक्रयोग्य है कि महाराजा यादविन्दर सिंह, लाहौर के प्रसिद्ध ऐचीशियन कालेज के विद्यार्थी रहे थे और जब देश के बंटवारे के बाद शिक्षा से वंचित रह गए विद्यार्थी मुश्किलों में थे तो उन्हें वाई. पी. एस. स्कूल की स्थापना करने का ख्याल आया। यह विद्यार्थी महाराजा यादविन्दर सिंह के पास मदद के लिए गए, तो महाराजा ने अपने पूर्व अध्यापक राय बहादुर श्री धनी राम कपिला को तत्काल संदेश भेजा और यह स्कूल शुरू करने और इस के पहले प्रमुख के तौर पर कार्य भार संभालने को कहा। इसके बाद 2 फरवरी 1948 में यादविन्दरा पब्लिक स्कूल 21 विद्यार्थियों और 9 अध्यापकों के साथ आस्तित्व में आ गया।