कैपटन अमरिन्दर सिंह ने पाकिस्तान को जा रहे फिज़़ूल दरियाई पानी संबंधी खटड़ के साथ अपनी चिंता साझी की

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By Admin
परंतु यह मामला केंद्रीय पैनल के विचाराधीन होने के कारण दोनों राज्यों में अलग बातचीत की संभावनाएं रद्द
यमुना सहित अन्य दरियाओं के फिज़़ूल जा रहे पानी को भी रोकने की ज़रूरत पर ज़ोर
चंडीगढ़, 14 मई:
      पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पाकिस्तान को जा रहे फिज़़ूल दरियाई पानी के बहाव संबंधी हरियाणा के अपने समकक्ष एम. एल. खटड़ चिंता की चिंता के साथ अपनी चिंता साझी की है परन्तु उन्होंने यमुना दरिया के फिज़़ूल जा रहे पानी को रोकने के लिए भी इसी तरह की कोशिश करने का न्योता देते हुए इस मामले को ध्यान से समझे जाने की अपील की है ।
      पंजाब और हरियाणा के बीच किसी भी तरह की अलग बातचीत या प्रस्तावित दूसरे रावी-ब्यास लिंक संबंधी अध्ययन के लिए बीबीएमबी की सेवाएं लेने की ज़रूरत की संभावनाओं को कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने रद्द किया है क्योंकि यह मामला राष्ट्रीय प्रोजैक्ट को लागू करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित की उच्च सामर्था कमेटी के विचार अधीन है।
   पाकिस्तान को जा रहे रावी दरिया के बहाव का प्रयोग संबंधी श्री खट्टड़ के अर्ध सरकारी पत्र नं 81437 (सी), तारीख़ 7-5-18 के जवाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा है कि, ‘हमें दरियाई पानी के सभी फिज़़ूल बहाव को लाजि़मी तौर पर रोकना चाहिए और किसानों के लिए पानी की एक -एक बूँद सुरक्षित बनानी चाहिए परंतु इसका बहुत ध्यान से अनुमान लगाया जाना चाहिए ।’
      कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सभी अन्य नदियोँ के भी फिज़़ूल जा रहे पानी के प्रयोग के लिए भी ठोस कोशिशें किये जाने का न्योता देते हुए कहा कि हम पंजाब में रावी और 2 अन्य दरियाओं सतलुज और ब्यास के पानी को किसानों के लिए सुरक्षित करने और किसी भी विधि से इसको फिज़़ूल न जाने देने संंबंधीे विचार किया है । अधिकारित स्रोतों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जुलाई, अगस्त और सितम्बर महीने के दौरान यमुना में 75 प्रतिशत पानी प्राप्त हुआ और इसमें से 50 प्रतिशत फिज़़ूल चला गया ।
      दरियाई पानी के फिज़़ूल बहाव को रोके जाने की बात करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा है और इसको कृषि के लिए 52 एम ए एफ पानी की ज़रूरत है जबकि दरिया केवल मुश्किल से 27 प्रतिशत का ही योगदान डाल रहे हैं । इसके नतीजा के तौर पर किसानों को धरती के निचले पानी पर निर्भर होना पड़ रहा है जिसकी बहुत ही ज़्यादा चिंताजनक स्थिति है और यह बहुत ज़्यादा नीचे चला गया है ।
      कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि माधोपुर रिम स्टेशन पर रावी दरिया के बहाव को निर्धारित किया गया है और ऊझ बेई, बासंतर, जल्लाला और तरनाह जैसी ट्रिबूटरियोंं से बहाव हो रहा है जो कि माधोपुर हैड वर्कस से रावी दरिया में पड़ता है । उन्होंने कहा कि जम्मू -कश्मीर सरकार ने अपने क्षेत्र में ऊझ ट्रिबूटरी पर डैम बनाने की योजना बनाई है जिसकी स्थिति ऊपर की तरफ है ।
      ऊझ से मुख्य तौर पर पानी के फिज़़ूल बहाव पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि ऊझ डैम के निर्माण के बाद पानी के उपलब्ध बहाव का जायज़ा लेना उपयुक्त होगा ।
      कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि वर्ष -2008 में अमतृसर ड्रेनेज सर्कल के सुपरइंटैंडिंग इंजीनियर ने ऊझ टिबूटरी पर स्टोरेज डैम के निर्माण के लिए प्रस्ताव जम्मू और कश्मीर सरकार को भेजा था जिसमें कहा था कि ऊझ स्टोरेज डैम पर पानी का बहुत ज़्यादा बहाव उपलब्ध है जो शाहपुर कंडी बराज की तरफ मोड़ा जा सकता है ।
      पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा हरियाणा के समकक्ष को भेजे गए पत्र में लिखा है कि 1999 से 2008 के समय के पानी के बहाव के आंकड़ों से अधारित और गुगल अर्थ इमेजरीज़ से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय जल स्रोत आयोग द्वारा रावी के पानी को हरीके की तरफ या ब्यास दरिया पर किसी अन्य उचित स्थान की तरफ भेजने के लिए दो वैकल्पिक प्रस्ताव तैयार किये थे । उन्होंने कहा कि पहले प्रस्ताव में रावी दरिया के पानी को मकौरा पत्तन पर लिफ़्ट करना था और उसे आर डी 79000 पर यू बीज डी सी मेनलाईन में छोडऩा था जबकि दूसरे प्रस्ताव में जैनपुर से पानी लिफ़्ट करना था और आरडी 79000 में यू बीज डी सी मैन लाईन में छोडऩा था। यह दोनों प्रस्ताव तकनीकी तौर पर अमल में न लाए जाने वाले थे। इस संबंधी में केंद्रीय जल स्रोत आयोग को 2015 में तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त हुई थी ।
      कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आगे कहा कि राष्टीय प्रोजैक्ट को लागू करने वाली उच्च सामर्था स्क्रीनिंग कमेटी ने अपनी 3-3-2017 की मीटिंग के दौरान इस पर विचार किया था। केंद्रीय जल स्रोत आयोग और सिंचाई विभाग पंजाब के अधिकारी की एक टीम गठित की थी जिसने प्रस्तावित दूसरे रावी -ब्यास लिंक वाले स्थान का दौरा करना था । इस टीम ने अभी तक किसी भी तकनीकी तौर पर दुरुसत पक्ष का सुझाव नहीं दिया जिसको अंतिम रूप दिया जा सके । इस लिएइस समय रावी पानी के लिए पंजाब में पानी भंडारण का निर्माण करना तकनीकी तौर पर संभव नहीं है ।
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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब
समाज को पतन से बचाने में साहित्यकारों का अहम योगदान-सुखजिन्दर सिंह रंधावा
सहकारिता मंत्री द्वारा मनजीत सिंह और जगदीप गरचा के अक्षर और आकार की जुगलबंदी वाली पुस्तक जारी
चंडीगढ़, 14 मई:
    सहकारिता मंत्री स.सुखजिन्दर सिंह रंधावा और पंजाबी साहित्य अकाडमी के प्रधान प्रो. रवीन्द्र भ_ल ने आज मनजीत सिंह और जगदीश गरचा के अक्षर और आकार की जुगलबंदी वाली पुस्तक ‘जुगलबन्दी’ को जारी किया। पंजाब कला भवन में हुए प्रभावशाली पुस्तक रिलीज समारोह में जारी की इस पुस्तक में उभरते शायर मनजीत सिंह की तुकों और चित्रकार जगदीप गरचा के चित्रों का सुमेल है।
    पुस्तक को रिलीज करने के उपरांत संबोधन करते हुए स. रंधावा ने कहा कि शायर ने अपने शब्दों और चित्रकार ने अपने चित्रों के द्वारा बड़े -बड़े मामलों पर व्यंग्य किया है। यह व्यंग्य समाज में आईं नैतिक कदरों-कीमतों में गिरावट, भ्रष्टाचार और रिश्तों के टूट रहे ताने-बाने पर है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार समाज को पतन से बचाने में अपना अहम योगदान डाल सकते हैं। उन्होंने राजनैतिक क्षेत्र में आए पतन का जि़क्र करते हुए कहा कि यदि राजनैतिक लोग शायरों की संगत में बैठने लग जाएँ तो शायर अपने व्यंग्यों के द्वारा राजनैतिक लोगों को अच्छाई की तरफ ले जाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
    पंजाबी साहित्य अकाडमी के प्रधान प्रो.रविन्दर भ_ल ने कहा कि इस पुस्तक के साथ शब्दों और चित्रों की नई किस्म की साझ पड़ी है। उन्होंने कहा कि कवि ने थोड़े शब्दों में बड़ी बात की है। उन्होंने कहा कि मनजीत सिंह में बेहतरीन शायर बनने का पूरा सामर्थ्य है। उन्होंने कहा कि असली कविता वह होती है जो श्रोतओं से ताली नहीं बल्कि उनके माथे के बल डलवा के सोचने के लिए मजबूर कर देती है।
    अंत में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के ओ.एस.डी. और मनजीत सिंह के बड़े भाई श्री एम.पी.सिंह ने प्रत्येक मेहमान का धन्यवाद करते हुए मनजीत सिंह के कॉलेज जीवन से ही साहित्य वाले रुझान संबंधीे प्रकाश डाला। इससे पहले मनजीत सिंह और जगदीप गरचा ने अपनी -अपनी कला संबंधी जि़क्र करते हुए इस पुस्तक के अस्तित्व में आने की कहानी बताई। मंच संचालन प्रो.चरनजीत सिंह उड़ारी ने किया जो कवि के अध्यापक रहे हैं। इस मौके पर जगदीप गरचा द्वारा बनाऐ चित्रों के साथ मुख्य मेहमान स. रंधावा और प्रो. भ_ल का सम्मान भी किया गया।
    इस अवसर पर रजिस्ट्रार सहकारी सोसायटी श्री ए.एस.बैंस, पनकोफैड के चेयरमैन श्री मुनेशवर चंद्र, लोक गायक पंमी बाई और डा.नन्द लाल भी उपस्थित थे।